Hanuman Chalisa

Corona के टीके के लिए करना पड़ सकता है और इंतजार, अगले 1 साल तक बड़ी सफलता की संभावना कम

Webdunia
शनिवार, 23 मई 2020 (18:40 IST)
नई दिल्ली। कोरोना वायरस का टीका तैयार करने के लिए कई भारतीय कंपनियां प्रयास कर रही हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि देश में शोध अब भी शुरुआती चरण में है और अगले 1 साल में किसी ठोस सफलता की संभावना कम ही है।
 
कोविड-19 का प्रसार रोकने के लिए टीका विकसित करने की दिशा में भारत सरकार और निजी कंपनियों ने अपने प्रयास तेज किए हैं। इस बीमारी के कारण अब तक देश में 3700 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 1,25,000 से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हैं।
 
प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपात स्थिति राहत कोष (पीएम-केयर्स फंड) न्यास ने कोरोना वायरस का टीका विकसित करने के प्रयासों में मदद के लिए 100 करोड़ रुपए की रकम आवंटित की है।
 
वायरस से लड़ने के लिए एक टीके के संदर्भ में प्रधानमंत्री कार्यालय के एक बयान में कहा गया था कि इसकी बेहद जरूरत है और भारतीय विद्वानों, स्टार्ट-अप और उद्योगों को इस टीके के विकास के लिए साथ आना चाहिए।
 
टीके के विकास के लिए रास्ता तलाशने के उद्देश्य से जैवप्रौद्योगिकी विभाग को केंद्रीय समन्वय एजेंसी बनाया गया है।
 
ट्रांसलेशनल स्वास्थ्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, फरीदाबाद के कार्यकारी निदेशक गगनदीप कंग ने कोविड-19 के टीके पर काम कर रही भारतीय कंपनियों का जिक्र करते हुए पिछले महीने कहा था कि जाइडस कैडिला दो टीकों पर काम कर रही है जबकि सीरम इंस्टीट्यूट, बायोलॉजिकल ई, भारत बायोटेक, इंडियन इम्युनोलॉजिकल्स और मिनवैक्स एक-एक टीका विकसित कर रहे हैं।
 
प्रमुख विषाणु विज्ञानी शाहिद जमील ने कहा कि भारत की टीका निर्माण की क्षमता उल्लेखनीय है और कम से कम तीन भारतीय कंपनियां- सीरम इंस्टीट्यूट, भारत बायोटेक और बायोलॉजिकल ई, अग्रणी हैं जो अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ कोविड-19 का टीका तैयार करने की दिशा में काम कर रही हैं।
 
उन्होंने पीटीआई को बताया कि भारत में कोविड-19 के टीके को लेकर शोध विकास के बेहद शुरुआती चरण में है और किसी भी उम्मीदवार के जानवरों पर परीक्षण के चरण तक इस साल के अंत तक ही पहुंचने की उम्मीद है।
 
भारतीय दवा कंपनियों में हालांकि काफी क्षमता और विशेषज्ञता है और उनके कोविड-19 की नई दवा को बाजार तक लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लिए शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित जमील ने कहा कि यह अनुभव संस्थानों, उद्योगों और नियामकों के साथ काम करने और भविष्य की तैयारी करने के लिये महत्वपूर्ण है।
 
सीएसआईआर-सेलुलर एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र (सीसीएमबी) के निदेशक राकेश मिश्रा ने कहा कि अभी हम जो जानते हैं उससे, हम फिलहाल टीके के विकास के लिए उन्नत चरण में नहीं हैं।
 
उन्होंने बताया कि कई विचार हैं और कंपनियां टीके के विकास की प्रक्रिया शुरू कर रही हैं लेकिन जहां तक टीका बनाने वालों की बात है अब तक कुछ भी परीक्षण के चरण में नहीं है।
 
उन्होंने कहा कि कई भारतीय कंपनियां विदेशी संस्थानों के साथ काम कर रही हैं। अन्य देश हमसे कहीं ज्यादा उन्नत चरण में हैं। कुछ तीसरे चरण का परीक्षण कर रहे हैं।

भारत में अभी कोई कंपनी दवा का परीक्षण नहीं कर रही है और वे अभी तैयारी के चरण में हैं। मिश्रा ने कहा कि चीन और अमेरिका टीके के विकास के मामले में हमसे कहीं ज्यादा आगे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई तुलना करनी हो तो हम अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के मुकाबले काफी पीछे हैं। (भाषा)

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

UP ATS का बड़ा एक्शन, पाकिस्तान से चल रहे आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, लखनऊ रेलवे स्टेशन को दहलाने की साजिश नाकाम

CBSE Exam 2026: प्रश्नपत्रों पर छपे QR कोड्स को लेकर बोर्ड की बड़ी सफाई, छात्र और अभिभावक न हों भ्रमित

राघव पर अब आतिशी का पलटवार, भगवंत मान भी बरसे, क्‍या भाजपा ज्‍वाइन करेंगे चड्ढा?

ईरान का बड़ा दावा, मार गिराया अमेरिकी F-15 फाइटर जेट, पायलट को बनाया बंदी! हड़कंप

अबू धाबी में गिरा मलबे का टुकड़ा, 5 भारतीय सहित 12 लोग घायल, एयर डिफेंस ने नाकाम किया हमला

सभी देखें

नवीनतम

भारत को LPG संकट से मिलेगी राहत, होर्मुज से निकला 1 और भारतीय जहाज, टैंकर में लदी है 46 हजार टन गैस

दबे पांव आया कुत्ता! फिर ऐसा आतंक मचाया कि दहशत में आ गए लोग... (वीडियो)

बुशहर परमाणु संयंत्र पर हमला, गार्ड की मौत, ईरान बुरी तरह भड़का

योगी सरकार की त्वरित कार्रवाई, इजराइल से सकुशल लौटा अखिलेश

PM मोदी ने केरल में भरी सियासी हुंकार, बोले- हवा बदल चुकी है, LDF का काउंटडाउन शुरू

अगला लेख