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कल्कि अवतार और तीसरा विश्व युद्ध: क्या दोनों का है कनेक्शन? कब और कैसे होंगे ये बड़े घटनाक्रम

वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 (13:27 IST)
हिंदु पुराणों के साथ ही ब्रह्मर्षि पोतुलुरी वीरब्रह्मेंद्र स्वामी द्वारा रचित कालज्ञानम और ओडिशा के पंचसखा, विशेषकर संत अच्युतानंद दास द्वारा रचित भविष्य मालिका में भगवान कल्कि के आने का उल्लेख मिलता है। तीसरे विश्व युद्ध और भगवान कल्कि के प्रकट होने का वर्णन बहुत ही रोमांचक है। इन ग्रंथों के अनुसार, यह कोई साधारण युद्ध नहीं बल्कि "धर्म-युद्ध" होगा। चलिए जानते हैं कल्कि और तीसरा विश्‍व युद्ध।
 

तीसरा विश्व युद्ध: विनाश की विभीषिका

भविष्य मालिका और कालज्ञानम के अनुसार, तीसरे विश्व युद्ध की परिस्थितियां कुछ इस प्रकार होंगी
1. युद्ध की अवधि: संत अच्युतानंद के अनुसार, यह युद्ध 6 साल और 6 महीने तक चलेगा। इसमें परमाणु हथियारों का प्रयोग होगा जिससे दुनिया की दो-तिहाई आबादी खत्म हो जाएगी।
 
2. शुरुआत और मुख्य देश: मालिका के अनुसार, युद्ध की शुरुआत तब होगी जब शनि कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे (जो वर्तमान समय के करीब की स्थिति है)। इसमें चीन और पाकिस्तान जैसे देश एक तरफ होंगे और भारत का संघर्ष उनके साथ होगा।
 
3. प्राकृतिक संकेत: युद्ध के दौरान आसमान में दो सूरज जैसा प्रकाश दिखेगा (संभवतः कोई बड़ा खगोलीय विस्फोट)। हवा जहरीली हो जाएगी और लोग भूख-प्यास से तड़पेंगे।
 
4. भारत की स्थिति: जब दुनिया के बड़े-बड़े विकसित देश (अमेरिका, यूरोप) नक्शे से लगभग गायब हो जाएंगे, तब भारत एक सुरक्षित द्वीप की तरह उभरेगा। ग्रंथों के अनुसार, गजपति महाराज के नेतृत्व में भारत का गौरव बढ़ेगा।
 

भगवान कल्कि: अधर्म का अंत

कल्कि अवतार के बारे में दोनों ग्रंथों में कुछ ऐसी बातें हैं जो प्रचलित मान्यताओं से थोड़ी अलग और रहस्यमयी हैं:
1. गुप्त अवतार: दोनों ही ग्रंथों का दावा है कि भगवान का जन्म हो चुका है, लेकिन वे अभी 'गुप्त' रूप में हैं। वे किसी साधारण मानव की तरह ही रह रहे हैं और अपनी दिव्य शक्तियों को प्रकट करने के लिए सही समय (महाविनाश के चरम) का इंतजार कर रहे हैं।
 
2. उनका स्वरूप: वे सफेद घोड़े पर सवार होकर आएंगे और उनके हाथ में 'रत्नमंडित खड्ग' (तलवार) होगी। यह तलवार बिजली की तरह चमकेगी और अधर्मियों का नाश करेगी।
 
3. महापुरुषों का साथ: भविष्य मालिका के अनुसार, भगवान अकेले नहीं लड़ेंगे। उनके साथ 'पंचसखा' (पांच सिद्ध संत) और '64 योगिनियां' अदृश्य रूप में उनकी सेना का हिस्सा होंगी।
 

4. अंतिम युद्ध: जब अधर्म अपनी चरम सीमा पर होगा और सज्जन पुरुषों का जीना दूभर हो जाएगा, तब कल्कि प्रकट होकर दुष्टों का संहार करेंगे। उनके प्रहार से कलियुग की काली छाया समाप्त होगी।

युद्ध के बाद का 'स्वर्ण युग'

विनाश के बाद जो बचेगा, वह होगा सतयुग:
1. बचे हुए लोग: केवल वे ही लोग जीवित बचेंगे जो सत्य, अहिंसा और भगवान के नाम में विश्वास रखते होंगे।
2. एक ही धर्म: दुनिया में कोई भेदभाव नहीं होगा, केवल 'सनातन धर्म' (शाश्वत सत्य) ही शेष रहेगा।
3. प्रकृति का पुनरुद्धार: युद्ध के बाद पृथ्वी फिर से शुद्ध हो जाएगी। बीमारियां खत्म होंगी और मनुष्य की आयु फिर से लंबी होने लगेगी।
 
एक रोचक तथ्य: कालज्ञानम में वीरब्रह्मेंद्र स्वामी ने लिखा है कि "जब कांची पीठ का पत्थर फटेगा और जगन्नाथ पुरी के मंदिर का पत्थर गिरेगा, तब समझ लेना कि कल्कि के प्रकट होने का समय आ गया है।"
 

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