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यहूदी, ईसाई और मुस्लिम धर्म की भविष्‍वाणी: क्या यही है 'कयामत' की लड़ाई?

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end of times final war
वर्तमान में इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को अब धार्मिक रंग दिया जाने लगा है। तीनों ही धर्मों के अनुयायी अब इसे अपनी भविष्यवाणियों की पुस्तकों से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, यह एक भू-राजनीतिक (Geo-political) युद्ध है, जिसे धार्मिक रंग देना सैनिकों में जोश और उत्साह भरने की एक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। यहूदी इसे 'अखरीत हा-यमीम' की जंग कह रहे हैं, तो मुस्लिम 'अल-मलहमातुल उजमा'। दूसरी ओर, ईसाई सैनिकों को बताया जा रहा है कि ईसा मसीह के आने का समय हो चुका है और उन्हें 'न्याय के दिन' (Judgment Day) के लिए खुद को समर्पित कर देना चाहिए।
 
यरूशलेम दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में से एक है। यह पहले यहूदियों, फिर ईसाइयों और अंत में इस्लाम धर्म का पवित्र स्थल बना। यरूशलेम इन तीनों धर्मों का केंद्र है और उनके लिए अत्यधिक महत्व रखता है। इस शहर पर आधिपत्य को लेकर तीनों धर्मों के बीच सदियों से सैकड़ों लड़ाइयाँ लड़ी गई हैं, जिनमें लाखों लोग मारे गए। अब यह शहर 'यहूदी-ईसाई बनाम इस्लाम' का केंद्र बन गया है। तीनों धर्मों के ग्रंथों में इस शहर का उल्लेख है और यह भी वर्णित है कि यहाँ एक अंतिम महायुद्ध होगा, जिसके बाद मसीहा का आगमन होगा। इसे 'एंड ऑफ टाइम्स' (End of Times) कहा जा रहा है।
 

1. यहूदियों का 'अखरीत हा-यमीम'

यह ईसाइयत या इस्लाम की तरह दुनिया के पूर्ण विनाश का विचार नहीं है, बल्कि इसे पृथ्वी के 'सुधार और पूर्णता' (Tikkun Olam) का समय माना जाता है। यहूदी धर्म में मसीहा कोई दैवीय ईश्वर नहीं, बल्कि डेविड (दाऊद) के वंश का एक 'मानव राजा' होगा। उसके आगमन पर निम्नलिखित घटनाएं होंगी:
 
इज़राइल की वापसी: दुनिया भर में बिखरे हुए यहूदी अपनी पवित्र भूमि (इज़राइल) लौट आएंगे।
तीसरे मंदिर का निर्माण: यरूशलेम में 'तीसरे पवित्र मंदिर' (Third Temple) का पुनर्निर्माण होगा।
वैश्विक शांति: युद्ध हमेशा के लिए समाप्त हो जाएंगे। 'भेड़िया और मेमना एक साथ चरेंगे', अर्थात क्रूरता का अंत होगा।
 
गॉग और मागॉग का युद्ध (War of Gog and Magog):
मसीहा के पूर्ण आधिपत्य से पहले एक महान संघर्ष की कल्पना की गई है। यह बुराई की शक्तियों का अंतिम प्रयास होगा, जिसमें ईश्वर स्वयं हस्तक्षेप कर इज़राइल की रक्षा करेंगे। यह युद्ध विनाश के लिए नहीं, बल्कि दुनिया को यह अहसास कराने के लिए होगा कि सत्य और ईश्वर एक ही हैं।
 
'ओलाम हा-बा' (The World to Come):
अंत समय के बाद शुरू होने वाले नए युग को 'ओलाम हा-बा' कहा जाता है। इसकी विशेषताएं हैं:
मृतकों का पुनरुत्थान: माना जाता है कि नेक लोगों को पुनः जीवित किया जाएगा।
ईश्वरीय ज्ञान: अज्ञानता और ईर्ष्या का अंत होगा और ईश्वर का ज्ञान सर्वत्र व्याप्त होगा।
प्रकृति में बदलाव: बीमारियां और दुःख समाप्त हो जाएंगे।
 

बेंजामिन नेतन्याहू और भविष्यवाणी:

यहूदी भविष्यवक्ता 'ईजीकेल' के अनुसार, इज़राइल पर 'गॉग' का हमला होगा (एक शक्तिशाली नेता जिसके पास विशाल सेना होगी)। आज भी कई यहूदी मानते हैं कि अंतिम युद्ध निकट है और मसीहा उनकी सहायता के लिए यरूशलेम आएंगे। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू स्वयं अपने भाषणों में इसका उल्लेख कर चुके हैं। उल्लेखनीय है कि यहूदी धर्मगुरुओं ने वर्षों पहले भविष्यवाणी की थी कि नेतन्याहू इज़राइल के ऐसे प्रधानमंत्री होंगे जो मसीहा के आगमन का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
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2. ईसाइयों का 'आर्मगेडॉन'

यह शब्द अच्छाई और बुराई के बीच होने वाले निर्णायक संघर्ष को दर्शाता है, जिसके बाद ईश्वर का राज्य स्थापित होगा। 'आर्मगेडॉन' हिब्रू शब्द 'हर मेगिद्दो' से बना है, जिसका अर्थ है 'मेगिद्दो का पर्वत'। बाइबल की अंतिम पुस्तक 'प्रकाशितवाक्य' (Revelation) में इस स्थान को अंतिम युद्ध के मैदान के रूप में वर्णित किया गया है।
 
महायुद्ध: अंत समय में दुनिया की 'बुरी ताकतें' एकजुट होकर ईश्वर की सेना के विरुद्ध युद्ध करेंगी।
मसीह का आगमन: युद्ध के चरम पर ईसा मसीह का पुनरागमन होगा। वे बुराई को परास्त करेंगे और शैतान को बंदी बना लिया जाएगा।
शांति का युग: इसके बाद पृथ्वी पर एक हजार वर्षों तक शांति और न्याय का शासन रहेगा।
आधुनिक संदर्भ: आज 'आर्मगेडॉन' शब्द का प्रयोग किसी भी वैश्विक आपदा (जैसे एस्टेरॉयड का टकराना या परमाणु युद्ध) के लिए भी किया जाता है।
वर्तमान परिदृश्य: बाइबल के अनुसार, परशिया (आज का ईरान) इज़राइल के विरुद्ध खड़ा होगा। ईसाई जगत में इस युद्ध को ईसा मसीह की वापसी और न्याय के दिन से जोड़कर देखा जा रहा है।
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3. मुस्लिमों का 'अल-मलहमातुल उजमा'

इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, यह 'क़यामत' (अंत समय) के निकट होने वाला भीषण महायुद्ध है। इसका अर्थ है- इतिहास का सबसे बड़ा नरसंहार।
स्थान: हदीसों के अनुसार, यह युद्ध सीरिया के 'दाबिक' या 'अमक' नामक स्थान पर होगा। यह युद्ध मुसलमानों और 'रूम' (पश्चिमी शक्तियों) के बीच होगा।
भीषणता: यह युद्ध इतना विनाशकारी होगा कि 100 में से 99 लड़ाके मारे जाएंगे।
विजय के बाद की घटनाएं: मुस्लिम सेना की आध्यात्मिक विजय के बाद 'दज्जाल' (Anti-Christ) का उदय होगा। अंततः हजरत ईसा (अलैहिस्सलाम) आसमान से उतरेंगे और दज्जाल का अंत करेंगे, जिसके बाद इमाम महदी और हजरत ईसा का न्यायपूर्ण शासन स्थापित होगा।
 

विशेष टिप्पणी: हिंदू धर्म का दृष्टिकोण

हिंदू धर्म के 'भविष्य पुराण', 'कल्कि पुराण' और 'भविष्य मालिका' के अनुसार, कलियुग के अंत में भीषण युद्ध होगा। जब अधर्म अपनी चरम सीमा पर होगा, तब भगवान विष्णु का 'कल्कि अवतार' होगा। वे दुष्टों का विनाश कर पुनः 'सत्ययुग' की स्थापना करेंगे। यह अंत नहीं, बल्कि समय के एक नए चक्र की शुरुआत है।
 

निष्कर्ष:

हिंदू और यहूदी धर्म की 'अंतिम युद्ध' और 'मसीहा' के आगमन की धारणाएं काफी समान हैं। जिस प्रकार हिंदुओं ने सदियों के संघर्ष के बाद अयोध्या में राम मंदिर की स्थापना की है, उसी प्रकार यहूदी भी यरूशलेम में अपने 'तीसरे मंदिर' (Third Temple) के निर्माण की आकांक्षा रखते हैं।

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