sundarkand

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

आषाढ़ अमावस्या 2026: पितरों की कृपा पाने और पितृदोष से मुक्ति के 5 अचूक उपाय

Advertiesment
Ashadh amavasya pitra mukti ke upay
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है, और जब बात आषाढ़ महीने की अमावस्या की हो, तो इसका आध्यात्मिक मूल्य और भी बढ़ जाता है। आषाढ़ अमावस्या को पितरों के तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य के लिए बेहद पवित्र माना गया है। यदि आपकी कुंडली में पितृदोष है या जीवन में बिना वजह परेशानियां आ रही हैं, तो इस दिन कुछ खास कार्य करके आप अपने पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं। आइए जानते हैं उन 5 मुख्य कार्यों के बारे में, जिन्हें करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और पितृदोष से मुक्ति मिलती है।
 

1. पवित्र नदी में स्नान और तर्पण

आषाढ़ अमावस्या के दिन सूर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी, सरोवर या तीर्थ स्थल पर स्नान करने का विधान है। यदि नदी पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद अंजलि में जल, काले तिल, कुश और जौ लेकर पितरों का ध्यान करते हुए उन्हें तर्पण दें। ऐसा करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और वे वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

2. पिंडदान और श्राद्ध कर्म

यदि किसी कारणवश पूर्वजों की पुण्यतिथि पर उनका श्राद्ध न किया जा सका हो, तो आषाढ़ अमावस्या इसके लिए सर्वोत्तम तिथि है। इस दिन योग्य ब्राह्मणों के माध्यम से आदरपूर्वक पितरों के निमित्त पिंडदान या तर्पण करवाना चाहिए। दोपहर के समय (कुतुप मुहूर्त में) किया गया श्राद्ध सीधे पितरों तक पहुंचता है और इससे कुंडली में मौजूद गंभीर से गंभीर पितृदोष भी शांत होता है।
 

3. पंचबलि भोग और ब्राह्मण भोज

अमावस्या के दिन सात्विक भोजन बनाएं और उसका एक हिस्सा सबसे पहले अग्नि को समर्पित करें। इसके बाद शास्त्रों के अनुसार 'पंचबलि' निकालें, यानी भोजन के पांच हिस्से करके उन्हें क्रमशः गाय, कुत्ते, कौए, देवादि और चींटियों को खिलाएं। इसके उपरांत आदरपूर्वक ब्राह्मणों को भोजन कराएं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, अनाज या दक्षिणा देकर उन्हें विदा करें। माना जाता है कि कौए और गाय के रूप में पितर ही हमारा दिया भोग स्वीकार करते हैं।

4. पीपल के वृक्ष की पूजा और दीपदान

पीपल के पेड़ में देवताओं के साथ-साथ पितरों का भी वास माना गया है। आषाढ़ अमावस्या के दिन सुबह के समय पीपल के वृक्ष पर जल में दूध, काले तिल और गंगाजल मिलाकर अर्पित करें। इसके बाद शाम के समय पीपल के जड़ के पास सरसों के तेल का एक दीपक (दीपदान) जलाएं और अपने पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करें। ध्यान रहे कि इस दिन पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करना भी अत्यंत शुभ फलदायी होता है।
 

5. तिल, अन्न और गुप्त दान

अमावस्या की तिथि दान के बिना अधूरी मानी जाती है। इस दिन जरूरतमंदों या किसी गरीब व्यक्ति को काले तिल, सफेद वस्त्र, छाता, चप्पल, घी या मौसमी फलों का दान करें। आषाढ़ के महीने में गर्मी और बारिश का मौसम होता है, इसलिए इस समय जल का दान करना (जैसे प्याऊ लगवाना या पानी का मटका दान करना) महापुण्य का काम माना जाता है। इस प्रकार के दान से पितर अत्यंत प्रसन्न होकर घर में खुशहाली का वरदान देते हैं।
ALSO READ: Halharini Amavasya 2026: हलहारिणी अमावस्या कब है, क्या करते हैं इस दिन?

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

गुप्त नवरात्रि 2026: पहले दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, जानें पूजा का सही समय