श्वान संचालन (Down Dog/up Dog) : आपको यह जानकर आश्चर्य होगा की क्या श्वान संचालन योग भी होता है। निश्चित ही कुछ आसन पशुओं के देखकर ही इजात किए गए हैं। यह अंग संचालन का एक हिस्सा है। हालांकि व्यक्ति इसे करता रहता है लेकिन उम्र बढ़ने के साथ ही वह इसे भूलता भी जाता है। पशुवत मनुष्य ही सेहतमंद बना रह सकता है।
अब हम डॉग संचानल की बात करते हैं। यह बहुत ही सरल है। कुत्ता जिस तरह से आलस लेता और वह जिस तरह से ऊंचा मुंह करके रोता है बस कुछ इसी तरह से करना है। यह अखाड़े में दंड लगाने जैसा भी है। हालांकि यह सूर्यनमस्कार कीयह दो एक स्टेप है। पहली स्टेप को भुजंगासन और दूसरी को अधोमुखश्वानासन कहते हैं। विदेशों में इसे अप डॉग और डाउन डॉग कहने लगे हैं।
हथेलियों को भूमि पर टिकाकर श्वास भरते हुए दाएं पैर को दूर तक पीछे की ओर ले जाएं और उसे पंजे के बल टिका दें। अब श्वास को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए बाएं पैर को भी पीछे ले जाकर दाएं पैर के साथ रखें। दोनों पैरों की एड़ियां परस्पर मिला दें। हथेलियों और पैरों के तलवे के बल पर शरीर को रखते हुए कूल्हों को थोड़ा ऊपर उठाएं। फिर ठोड़ी को कंठ में दबाते हुए गर्दन को पेट की ओर दबाएं। इसमें शरीर अंग्रेजी के उलटे यू के समान दिखाई देता है।
फिर घुटना और पेट जमीन पर टिकाते हुए भुजंगासन करें। पुन: डॉग पोजिशन में लौटकर फिर भुजंगासन करें। ऐसा सुविधानुसार 7, 14 या 21 बार करें। अंत में विश्राम मुद्रा में कुछ देर खड़े रहकर प्राणायाम करें और फिर नमस्ते करें।
इसका लाभ : यह आपकी बॉडी को स्लिम और फिट भी बनाए रखेगा। उम्र को बढ़ने से रोक देगा। हर तरह का तनाव हटाकर आत्मविश्वास बढ़ाने में सक्षम है। यह पूरे शरीर से तनाव को हटाकर शरीर को सुकून देता है। इससे थकान मिट जाती है।
About Writer
अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं।
दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।....
और पढ़ें