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जिम जाना सही या योग करना, जानिए डिफरेंस

अनिरुद्ध जोशी
गुरुवार, 2 सितम्बर 2021 (17:28 IST)
अखड़ों की जगह आजकल जिम का प्रचलन हो चला है। सवाल यह उठता है कि जिम की कसरत करना सही है या योग की? दोनों में अंतर क्या है और क्या होता है फायदा या नुकसान। जानिए कुछ खास 10 बातें।
 
 
1. जिम में हार्ड जबकि योग में सॉफ्ट एक्सरसाइज होती है।
 
2. जिम में उपकरणों के साथ एक्सरसाइज की जाती है जबकि योग में किसी भी प्रकार के उपकरणों की जरूरत नहीं होती है।
 
3. जिम में अक्सर लोग बॉडी बनाने के लिए जाते हैं जबकि योग को जवान और सेहतमंद बना रहने के लिए किया जाता है।
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4. जिम की एक्सरसाइज हार्ट पर प्रेशर डालती है। इसमें अधिकतर कार्डियो एक्‍सरसाइज होती है जब‍कि योग करने से हार्ट पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं पड़ता है।
 
 
5. यदि आपको किसी बॉडी प्रतियोगिता में हिस्सा लेना हो, कुश्ती लड़ना हो, हीरो बनना हो या वजन उठाना हो तो जिम जाना चाहिए ऐसा कुछ नहीं करना बस स्वस्थ और निरोगी रहकर युवा बने रहना चाहते हैं तो योग करें।
 
6. जिम और योग का सबसे बड़ा अंतर यह है कि जिम की एक्सरसाइज करने के बाद आप थका हुआ महसूस करेंगे, लेकिन योग के आसन करने के बाद आप खुद को पहले से कहीं ज्यादा तरोताज महसूस करेंगे। यदि जीवन में जिम की आवश्यकता है तो अवश्यक करें और यदि नहीं है तो फिर क्यों व्यर्थ में शरीर को थकाते हैं।
 
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7. जिम में ‍हमारी हड्डियों के साथ मांस-पेशियां भी हार्ड हो जाती है। माना जाता है कि जिम जाना छोड़ देने के बाद यह बनावटी हार्डनेस व्यक्ति को वक्त से पहले बुढ़ा बना देती है। जबकि योग करने से हड्डियां फ्लेसिबल हो जाती है।
 
8. देखने में आया है कि जिम का शरीर गठिला, कसा हुआ और हार्ड होता है। योग का शरीर लचीला और सॉफ्ट होता है। 
 
9. जिम के शरीर को अतिरिक्त भोजन की भी आवश्यकता होती ही है। इस शरीर को रोग और शोक से बचे रहने की क्षमता की कोई गारंटी नहीं। जबकि योग के शरीर को अतिरिक्त भोजन की आवश्यकता नहीं होती और यह सभी तरह के रोग से बचने की क्षमता रखता है।
 
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10. मानते हैं कि जिम की कसरत छोड़ने के बाद शरीर में एकदम से ढलाव आने लगता है इसलिए जिम की कसरत को जारी रखना जरूरी है अन्यथा हाथ-पैर दर्द करने लगते हैं। उम्र बढ़ने के साथ-साथ जोड़ों का दर्द बढ़ने लगता है। माँस-पेशियों में खिंचाव की समस्या से लड़ना पड़ता है। जबकि लगातार योग करने के बाद योग छोड़ भी देते हैं तो इससे शरीर में किसी भी प्रकार का ढलाव नहीं आता और हाथ-पैर में दर्द भी नहीं होता। जब स्फूर्ती दिखाने का मौका होता है तो यह शरीर एकदम से सक्रिय होने की क्षमता रखता है।

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