Publish Date: Friday, 30 January 2026 (17:42 IST)
Updated Date: Friday, 30 January 2026 (01:44 IST)
Year Ender 2025: वर्ष 2025 धार्मिक घटनाक्रमों के लिहाज से कई तरह के घटनाक्रमों का वर्ष रहा। प्रयागराज में महाकुंभ और उसमें भगदड़ से लेकिन अयोध्या में ध्वजारोहण तक कई समारोह हुए। कई शुभ और अशुभ घटनाएं भी हुई। इसका कारण ज्योतिषियों के ग्रहों के बड़े राशि परिवर्तन और खगोलीय घटना को माना। आओ जानते हैं 5 बड़ी खगोलीय घटनाएं।
वर्ष 2025 में कई रोमांचक खगोलीय घटनाएँ होंगी, जिनमें प्रमुख हैं उल्कापिंड वर्षा (जैसे पर्सिड्स और जेमिनिड्स), सुपरमून (साल के अंत में), ग्रहों का संरेखण (अगस्त में), और चंद्र ग्रहण (सितंबर में), साथ ही यूरेनस का नया चंद्रमा (S/2025 U1) की खोज और विभिन्न ग्रहों और चंद्रमाओं के बीच युतियाँ (conjunctions) भी देखने को मिलेंगी, जो खगोल प्रेमियों के लिए बेहतरीन अवसर प्रदान करेंगी।
1. ग्रहों की परेड: इस वर्ष 2025 में अंतरिक्ष में दुर्लभ 'प्लैनेट परेड' भी देखने को मिली। सूर्य का चक्कर लगाते हुए एक 7 ग्रह एक ही सीध में आ गए थे। यह नजारा 21 जनवरी की रात से 25 जनवरी 2025 की रात देखा गया। इसे अंतरिक्ष में ग्रहों का महाकुंभ भी कहा गया। इसके बाद 28 फरवरी यह नजारा देखा गया और फिर 8 मार्च को यह परेड खत्म हो गई। कुछ लोगों का मानना था कि 6 ग्रह (मंगल, बृहस्पति, यूरेनस, नेप्च्यून, शुक्र, और शनि) एक सीधी रेखा में दिखाई दिए। इसके बाद 10 अगस्त को बुध, शुक्र, बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून एक सीध में दिखाई दिए।
2. चंद्र और सूर्य ग्रहण: वर्ष 2025 में कुल चार ग्रहण लगे:- चंद्र ग्रहण 14 मार्च और 7 सितंबर। सूर्य ग्रहण 29 मार्च और 21 सितंबर। इन ग्रहणों के चलते देश और दुनिया में बड़े भूकंप आए और साथ ही ज्वालामुखी फटने की घटनाएं भी हुई। इसी के कारण भयानक तूफानों का जोर भी रहा। भारत में कोई भी सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं दिया, लेकिन चंद्र ग्रहण आंशिक रूप से दृश्यमान रहे।
3. चार बड़े ग्रहों का राशि परिवर्तन: इस वर्ष 4 बड़े ग्रहों ने राशि परिवर्तन किया और बृहस्पति देव 8 वर्षों के अतिचारी चाल चलने लगे। सबसे पहले 29 मार्च को शनिदेव ने कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश किया जिसके चलते देश और दुनिया में राजनीतिक उथल-पुथल प्रारंभ हो गई। इसके बाद 14 मई को बृहस्पति देव ने वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में गोचर करके अतिचारी चाल प्रारंभ की। इसके परिणाम स्वरूप जलवायु परिवर्तन, मौसम में बदलाव और सुख शांति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। इसके बाद 18 मई को राहु ने कुंभ में और केतु ने सिंह राशि में प्रवेश करके देश और दुनिया में टेक्नोलॉजी का विकास किया।
4. उल्का वर्षा: जनवरी में क्वाड्रेंटिड्स के बाद पर्सिड्स उल्का वर्षा (12-13 अगस्त, सबसे शानदार में से एक एक थी)। इसके बाद 14 दिसंबर को यह साल की सबसे शानदार उल्का जेमिनिड्स वर्षाओं में से एक साबित हुआ। जिसमें प्रति घंटे 50 से 120 उल्काएं दिखाई दी। यह उल्काएं क्षुद्रग्रह 3200 फेथॉन और क्षुद्रग्रह 2003 EH1 से संबंधित हैं। जेमिनिड्स उल्का वर्षा को 'उल्का वर्षा का राजा' कहा जाता है। इस वर्ष यह अपने चरम पर रहा, जिसमें एक घंटे में 100 से अधिक टूटते तारे दिखाई दिए। इसका स्रोत धूमकेतु नहीं, बल्कि क्षुद्रग्रह (Asteroid) 3200 फेथॉन था।
5. मंगल ग्रह का पृथ्वी के निकट आना: फरवरी-मार्च 2025 की इस अवधि में मंगल ग्रह (Mars) अपनी कक्षा में पृथ्वी के अपेक्षाकृत करीब आया, जिससे रात के आकाश में यह अत्यधिक चमकीला और बड़ा दिखाई दिया, जो खगोल प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इससे ज्योतिष यह आशंका जताने लगे कि युद्ध के ग्रह का धरती के करीब आना युद्ध को भड़का सकता है। हालांकि हुआ भी यही।