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पश्चिम दिशा का मकान है तो वास्तुदोष होने से होंगे ये 5 नुकसान

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आपका मकान यदि पश्चिम दिशा में है तो आप उस दिशा को अच्छे से रखें, क्योंकि पश्‍चिम दिशा का स्वामी शनि ग्रह है। इस दिशा के ग्रह से आयु, बल, दृढ़ता, विपत्ति, यश व नौकर-चाकरों का विचार किया जाता है। इस दिशा के दूषित या पीड़ित होने के अर्थ है कि कहीं इस दिशा में स्तंभ वेध, छाया वेध आदि तो नहीं है। आओ जानते हैं कि क्या होता है इस दिशा में मकान का द्वार होने और उसके वास्तु दोष होने से।
 
 
1. विपत्ति को बुलावा : ज्योतिषीय आधार पर शनि पश्चिम दिशा का स्वामी है और शनि एक नपुंसक जाति का कृष्ण वर्ण तथा वायु तत्व वाला ग्रह है। यदि यह दिशा किसी भी प्रकार से वास्तु दोष से पीड़ित है तो विपत्ति को बुलाआ माना जाएगा।
 
 
2. नौकरी में परेशानी : पश्चिम दिशा में दोष या जन्मपत्री में शनि के पीड़ित होने पर नौकरों से क्लेश या नौकरी में परेशानी खड़ी होगी।
 
 
3. गंभीर रोग : इस दिशा के किसी भी प्रकार से दूषित होने पर वायु विकार, लकवा, रीढ़ की हड्डी में तकलीफ, चेचक, कैंसर, कुष्ठ रोग, मिर्गी, नपुंसकता, पैरों में तकलीफ आदि होने की संभावना बनी रहती है।
 
 
4. भूत बाधा : कहीं कहीं यह भी कहा गया है कि इस दिशा के दोष से व्यक्ति के घर पर भूत-प्रेत का भय भी बना रहता हैं।
 
 
5. बरकत होती खत्म : पश्चिम दिशा में दरवाजा है और वह वास्तुदोष से युक्त होने के साथ ही घर का वास्तु भी बिगड़ा है तो घर की बरकत खत्म होती है। यह आपके व्यापार में लाभ तो देगा, मगर यह लाभ अस्थायी होगा। हालांकि जरूरी नहीं है कि पश्चिम दिशा का दरवाजा हर समय नुकसान वाला ही होगा।
 

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