Hanuman Chalisa

वसंत पंचमी 2018 : कब और कैसे करें पूजन, पढ़ें शुभ मुहूर्त

Webdunia
सारी प्रकृति जब खुशी से झुमती दिखाई दे तो समझ लीजिए कि वसंत आ गया है। मां सरस्वती की पूजन और आराधना के इस पवित्र दिन का अत्यंत महत्व है। इस दिन विद्या, ज्ञान और बुद्धि की अधिष्ठात्री मां शारदा विशेष आशीष प्रदान करती है। 
 
माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत पंचमी कहा जाता है। ज्ञान,विद्या, बुद्धि व संगीत की देवी सरस्वती का आविर्भाव इसी दिन हुआ था। इसलिए यह तिथि वागीश्वरी जयंती व श्री पंचमी के नाम से भी प्रसिद्ध है। ऋग्वेद के 10/125 सूक्त में सरस्वती देवी के असीम प्रभाव व महिमा का वर्णन किया गया है। पौराणिक ग्रंथों में भी इस दिन को बहुत ही शुभ माना गया है व हर नए काम की शुरुआत के लिए यह बहुत ही मंगलकारी माना जाता है। वर्ष 2018 में यह पर्व 22 जनवरी को आ रहा है। 
 
ज्ञान पंचमी अर्थात् वसंत पंचमी की पौराणिक कथा
 
ब्रह्मा जी ने जब सृष्टि की रचना की तब इसकी नीरसता को देखकर वे अप्रसन्न हुए। फिर उन्होंनें अपने कमंडल से जल छिटका जिससे चारों तरफ धरा हरी-भरी हो गई। रंगबिरंगे फूल खिल गए। नदिया कलकल छलछल बहने लगी, संगीत की स्वर लहरियों से वातावरण सुमधुर हो गया तभी श्वेत परिधानों में अत्यं‍त सुंदर देवी प्रकट हुई। यह विद्या, बुद्धि, ज्ञान व संगीत की देवी सरस्वती थीं। ब्रह्मा जी ने उन्हें आदेश दिया कि इस संसार में ज्ञान व संगीत का संचार कर जगत का उद्धार करो। देवी ने वीणा के तार झंकृत किए जिससे समस्त प्राणी बोलने लगे, नदियां प्रवाहमयी होकर बहने लगी, हवा ने भी सन्नाटे को चीर कर मीठा संगीत पैदा किया। वह दिन वसंत पंचमी का था तब से ही बुद्धि व संगीत की देवी के रुप में मां सरस्वती पूजी जाने लगी।
 
यह सुनिश्चित हुआ कि माघ के शुक्ल पक्ष की पंचमी को समस्त विश्व तुम्हारी विद्या व ज्ञान की देवी के रुप में पूजा करेगा। भगवान श्री कृष्ण ने सबसे पहले देवी सरस्वती की पूजा की तब से लेकर निरंतर वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा लोग करते आ रहे हैं।
 
वसंत पंचमी 2018 - पूजा का शुभ मुहूर्त
 
वसंत पंचमी - 22 जनवरी 2018
 
पूजा का शुभ और सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त  - 07:17 से 12:32 बजे तक
 
पंचमी तिथि का आरंभ - 15:33 बजे से (21 जनवरी 2018)
 
पंचमी तिथि समाप्त - 16:24 बजे (22 जनवरी 2018)
 
कैसे करें वसंत पंचमी पूजा
 
प्रात:काल स्नानादि कर पीले, नारंगी, गुलाबी या श्वेत वस्त्र धारण करें। मां सरस्वती की प्रतिमा को सामने रखें। मंगल कलश स्थापित कर भगवान गणेश व नवग्रह की विधिवत पूजा करें। फिर मां सरस्वती की पूजा करें। मां की पूजा करते समय सबसे पहले उन्हें आचमन व स्नान कराएं। फिर मां शार दा का फूलों से का श्रृंगार करें। मां श्वेत वस्त्र धारण करती हैं इसलिए उन्हें श्वेत वस्त्र पहनाएं। प्रसाद के रुप में खीर अथवा दुध से बनी मिठाईयां चढ़ा सकते हैं। श्वेत फूल अर्पण करें। 
 
कुछ क्षेत्रों में देवी की पूजा कर प्रतिमा को विसर्जित भी किया जाता है।
 
विद्यार्थी मां सरस्वती की पूजा कर गरीब बच्चों में कलम व पुस्तकों का दान करें।
 
संगीत से जुड़े व्यक्ति अपने साज पर तिलक लगा कर मां की आराधना करें व बांसुरी भेंट करें। 
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

शुक्र का सिंह राशि में गोचर, इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जरूर करें ये 3 उपाय

अमरनाथ यात्रा 2026: निकलने से पहले जरूर कर लें ये 5 जरूरी तैयारियां, तभी रहेगा सफर सुरक्षित

Vakri Budh Effect: बुध की कर्क राशि में वक्री चाल, इन 3 राशियों को रहना होगा बेहद सतर्क

क्या धरती से टकराएगा विशालकाय उल्कापिंड? जानें कब सच हो सकती है यह भविष्यवाणी

राहु-गुरु का षडाष्टक योग बना, जानें 12 राशियों पर कैसा पड़ेगा असर

सभी देखें

धर्म संसार

Kalashtami 2026: कालाष्टमी का क्या है महत्व?

जब बुध चलेंगे उल्टी चाल: इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, बरसेगा धन

Vastu Shastra: वास्तु के ये 10 नियम बदल सकते हैं घर का माहौल, बनी रहेगी सुख-समृद्धि

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (06 जुलाई, 2026)

06 July Birthday: आपको 6 जुलाई, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

अगला लेख