Publish Date: Fri, 25 Sep 2020 (16:04 IST)
Updated Date: Fri, 25 Sep 2020 (16:08 IST)
लखनऊ। केंद्र सरकार के कृषि विधेयक के खिलाफ आज शुक्रवार को तमाम विपक्षी पार्टियों के साथ भारतीय किसान यूनियन के देशव्यापी बंद का मिलाजुला असर देखने को मिल रहा है। संसद के दोनों सदनों से 3 कृषि बिल पास हो चुके हैं लेकिन लेकिन विरोध कम होता नहीं दिख रहा है। उत्तरप्रदेश में राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी, सीतापुर तथा रायबरेली के अलावा पश्चिमी उत्तरप्रदेश में किसान आज विभिन्न दल के नेताओं के साथ सड़कों पर उतरे। कई जगह पराली जलाई गई।
पुलिस के बेहद मुस्तैद रहने के बावजूद कई जगह सड़क जाम करने का प्रयास किया गया। भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले पश्चिमी उत्तरप्रदेश में भी किसान इसके विरोध में सड़क पर उतरे हैं। कृषि बिल के विरोध में आज बंद में 31 संगठन शामिल हैं। बिल का विरोध किसान संगठनों के अलावा कांग्रेस, आरजेडी, समाजवादी पार्टी, अकाली दल, आप, टीएमसी समेत कई पार्टियां कर रही हैं। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में इसका थोड़ा असर है।
बिल पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आश्वासन के बाद भी किसानों का गुस्सा कम नहीं हो रहा है। किसान बिल ने पूरे विपक्ष को एकसाथ आने का मौका दे दिया है। लखनऊ से सटे बाराबंकी के साथ ही बागपत व मिर्जापुर में किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान नेशनल हाईवे पर पराली जलाकर आगजनी का प्रयास भी किया गया है। कई जगह पर सड़क जाम करने के साथ किसान प्रदर्शन कर रहे हैं।
हर जगह पर पर्याप्त संख्या में पुलिस के साथ पीएसी के जवान भी मुस्तैद हैं। लखनऊ के मोहनलालगंज में बड़ी संख्या में किसान तहसील में पहुंचे। बाराबंकी में सैकड़ों की संख्या में किसानों ने अयोध्या-लखनऊ हाईवे जाम कर दिया है। किसान आंदोलन से राहगीरों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। हाईवे के दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी लाइनें लग गई हैं।
किसानों का आरोप है कि केंद्र के कृषि बिल से न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था खत्म हो जाएगी और कृषि क्षेत्र भी देश के बड़े पूंजीपतियों के हाथों में चला जाएगा। उन्होंने कहा कि तीनों विधेयक वापस लिए जाने तक वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। किसान अध्यादेश बिल पास होने के विरोध में रायबरेली में किसान कांग्रेस की अगुवाई में पार्टी कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं। भारतीय कम्युनिट पार्टी के सचिव अतुल कुमार अंजान ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अब खेती भी कॉर्पोरेट घराने के हाथ सौंपना चाहती है।