Publish Date: Mon, 03 Aug 2026 (15:04 IST)
Updated Date: Mon, 03 Aug 2026 (15:12 IST)
श्रावण मास के प्रथम सोमवार के अवसर पर भगवान शिव के जलाभिषेक एवं दर्शन के लिए बाबा औघड़नाथ मंदिर में सोमवार तड़के करीब 3:30 बजे से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शिवभक्तों की सुरक्षा और बिना रूके आसानी से दर्शन करने के लिए मेरठ पुलिस ने मंदिर परिसर सहित आसपास के क्षेत्र में व्यापक और सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था लागू की है।
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कांवड़ियों के वाहनों को केवल निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही रुकवाया जा रहा है, जिससे मंदिर तक जाने-आने वाले मुख्य मार्गों पर यातायात सुचारु रूप से बनी रहे और दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े।
पुलिस-प्रशासन ने मंदिर परिसर में गर्भगृह से लेकर मुख्य प्रवेश एवं निकास द्वार तक त्रिस्तरीय (3-लेयर) सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। किसी भी आपात स्थिति से तत्काल निपटने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) को भी रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत मंदिर में प्रवेश करने वाले सभी संदिग्ध व्यक्तियों एवं वस्तुओं की आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की सहायता से सघन जांच की जा रही है। इसके साथ ही मंदिर प्रशासन एवं मंदिर समिति के साथ निरंतर समन्वय स्थापित कर दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित रखने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि दर्शन कर बाहर निकलने वाले और नए आने वाले श्रद्धालुओं का आवागमन निरन्तर चल सके।
पूरे क्षेत्र की निगरानी ड्रोन कैमरों एवं डॉग स्क्वाड के माध्यम से लगातार की जा रही है। पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं और मंदिर प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर सुरक्षा व्यवस्था का प्रभावी संचालन किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित, व्यवस्थित एवं सुगम दर्शन का अनुभव मिल सके।
1857 क्रांति का उद्गम स्थल है बाबा औघड़नाथ मंदिर
मेरठ का ऐतिहासिक बाबा औघड़नाथ मंदिर भगवान शिव के प्रमुख सिद्धपीठों में माना जाता है। यह मंदिर छावनी क्षेत्र में स्थित है और 1857 की क्रांति का उद्गम स्थल भी है। धार्मिक मान्यता है कि सावन के महीने में यहां जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं तथा भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
शिवरात्रि पर दूर-दराज से शिवभक्त कांवड़ लाकर अपनी मनोकामना के लिए स्वयंभू शिवलिंग पर जलाभिषेक करते है। यही कारण है कि श्रावण मास, विशेषकर सोमवार के दिन, दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु और कांवड़िए यहां गंगाजल अर्पित करने पहुंचते हैं। आस्था और श्रद्धा का यह केंद्र सावन के दौरान आध्यात्मिक ऊर्जा, भक्ति और जनआस्था का विशाल संगम बन जाता है।