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इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल: फायदे ज्यादा या नुकसान? वाहन मालिकों के लिए जरूरी जानकारी

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Ethanol Blending petrol car
जब से दुनिया में ईंधन का संकट बढ़ा है तब से भारत सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलेगे, सोर ऊर्जा और इलैकट्रॉनिक ऊर्जा को बढ़ावा देना प्रारंभ कर दिया है। वर्तमान में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की ज्यादा चर्चा हो रही है। यह भी बताया जा रहा है कि यह LPG का विकल्प बन सकता है। चलिए जानते हैं कि यह इथेनॉल क्या है, कैसे बनता है और क्या यह वाहनों के इंजन पर नकारात्मक असर डाल सकता है? 
 

इथेनॉल क्या है?

एथेनॉल (Ethanol) एक प्रकार का अत्यधिक शुद्ध अल्कोहल है जिसे आम बोलचाल में 'एथिल अल्कोहल' भी कहा जाता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से मादक पेय पदार्थों (शराब, बीयर आदि) में पीने योग्य अल्कोहल के रूप में भी किया जाता है।
 

इथेनॉल कैसे बनता है?

इथेनॉल (Ethanol) मुख्य रूप से फर्मेंन्टेशन (किण्वन) प्रक्रिया द्वारा बनता है। इसके लिए गन्ने का रस, शीरा (Molasses), या स्टार्च वाले अनाज (जैसे मक्का, टूटे चावल) का इस्तेमाल होता है।

इथेनॉल के फॉयदे क्या है?

पर्यावरण को लाभ: पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से गाड़ियों से होने वाला कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन का उत्सर्जन बहुत कम हो जाता है जिससे प्रदूषण नहीं होता है और पर्यावरण के लिए यह अच्छा माना जाता है।
किसानों की आय: मक्का, गन्ना और खराब अनाज का सही दाम मिलने से किसानों को सीधा फायदा होता है। 
देश की बचत: भारत को बाहर से कम कच्चा तेल (Crude Oil), LPG आदि इम्पोर्ट करना पड़ता है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होती है। अरब राष्ट्रों पर भारत की निर्भरता कम होगी।
 

क्या इससे वाहनों के इंजन पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है?

1. पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से इंजन पर बुरा असर पड़ेगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि गाड़ी कितनी पुरानी है और पेट्रोल में कितने प्रतिशत इथेनॉल मिलाया गया है।
 
2. इथेनॉल Hygroscopic (नमी सोखने वाला) होता है। यह हवा से पानी को सोख लेता है। अगर गाड़ी लंबे समय तक (जैसे 2-3 महीने) एक ही जगह खड़ी रहे, तो पेट्रोल में मौजूद इथेनॉल टैंक की हवा की नमी सोखकर पानी के साथ मिलकर टैंक के नीचे बैठ जाता है और शुद्ध पेट्रोल ऊपर आ जाता है। जब आप गाड़ी स्टार्ट करते हैं, तो इंजन में पेट्रोल की जगह पानी और इथेनॉल का मिश्रण चला जाता है, जिससे इंजन स्टार्ट नहीं होता है।
 
3. जब ईंधन टैंक में पानी की मात्रा बढ़ती है, तो इंजन के अंदरूनी लोहे के पुर्जों में जंग (Rust) लगने लगती है। साथ ही, इथेनॉल एल्युमिनियम, पुरानी गाड़ियों के फ्यूल पाइप, गास्केट और ओ-रिंग्स जो रबर या प्लास्टिक के बने होते हैं, इथेनॉल के संपर्क में आकर गलने या कड़क होकर टूटने लगते हैं। इससे फ्यूल लीक होने का खतरा बढ़ जाता है।
 

नई गाड़ियां के इंजन को नहीं होगा नुकसान

1. E10 ईंधन (10% इथेनॉल): भारत में पिछले कई सालों से सभी गाड़ियों में 10% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल हो रहा है। इससे किसी भी गाड़ी के इंजन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता।
 
2. E20 ईंधन (20% इथेनॉल): भारत में सरकार 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) को तेजी से लागू कर रही है। 2023 के बाद बनी लगभग सभी नई गाड़ियाँ और बाइक्स "E20 Compliant" हैं। इनके इंजन में जंग-रोधी कोटिंग की गई है और मजबूत रबर पाइप्स का इस्तेमाल किया गया है, इसलिए इन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता।
 
यदि आपकी गाड़ी नई (E20 रेडी) है, तो डरने की कोई बात नहीं है। लेकिन बहुत पुरानी गाड़ियों में उच्च मात्रा वाला इथेनॉल पेट्रोल लंबे समय में इंजन के पुर्जों को कमजोर कर सकता है।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : उपरोक्त आलेख में दी गई सामान्य जानकारी है, पाठकों पर इस पर और अधिक जानकारी हासिल करने के बाद ही कोई निर्णय लेना चाहिए। एथेनॉल से गाड़ियों को होने वाले नुकसान पर कुछ भी कहा जाना अभी संभवन नहीं है क्योंकि अभी इस पर शोध जारी है। 

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