Publish Date: Sat, 11 Mar 2017 (20:12 IST)
Updated Date: Sat, 11 Mar 2017 (20:15 IST)
आज बिरज में होरी रे रसिया... और होली खेलें रघुबीरा अवध में....होली से संबंध रखने वाले इन लोकगीतों का संबंध देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से ही है और विधानसभा चुनाव में यहां भगवा पार्टी के नाम से मशहूर भाजपा ने रिकॉर्ड बहुमत हासिल कर लिया है। इसमें कोई संदेह नहीं कि होली से ठीक पहले मिली इस जीत का असर होली के रंगों पर भी दिखाई देगा। इस बार राज्य में 'केसरिया' होली की धूम रहेगी।
उल्लेखनीय है कि 403 सदस्यीय यूपी में करीब 324 सीट जीतकर विधानसभा को केसरिया रंग में रंग दिया है। इस बार यूपी में न तो मायावती को सोशल इंजीनियरिंग काम आई, न ही समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन को लोगों ने स्वीकार किया। हालांकि बसपा सुप्रीमो मायावती ने तो हार का गम हलका करने के लिए केन्द्र की भाजपा सरकार पर वोटिंग मशीन में छेड़छाड़ का आरोप मढ़ दिया। उन्होंने इसके पीछे तर्क दिया कि भाजपा मुस्लिम इलाकों में भी जीती है, जो कि संभव नहीं है। शायद उनका यही मानना था कि मुस्लिम वोटरों पर सिर्फ उनका ही हक है।
रंगों के त्योहार होली से ठीक पहले भाजपा को मिली इस बंपर जीत ने भगवा खेमे में उत्साह का रंग भर दिया है। निश्चित ही आने वाले विधानसभा चुनावों यह रंग देखने को मिलेगा। यूपी और उत्तराखंड के परिणाम के बाद जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेकां नेता उमर अब्दुल्ला ने यह कहकर विपक्षी खेमे को निराश करने की कोशिश की है कि यह भाजपा की सुनामी है। 2019 को भूल जाइए। मोदी को चुनौती देना संभव नहीं है। 2024 की तैयारी करनी चाहिए। यह कहकर उन्होंने भाजपा का मनोबल ही बढ़ाने का काम किया है।
हालांकि अब होली के त्योहार में ठंडाई और रंगों का दौर भी चलेगा। ऐसे में यूपी में मुख्यमंत्री पद के दावेदारों का यहां अच्छा खासा मजमा लगने वाला है। उनके ठिकानों और घरों पर समर्थकों का मजमा जुटने वाला है। अब राज्य में रंगों के माध्यम से कुर्सी की राजनीति का खेल चलने वाला है। अब यूपी में बसपा और समाजवादी पार्टी के रंग तो फीके पड़ चुके हैं। ऐसे में यूपी और उत्तराखंड की होली में इस बार केसरिया रंग का ही जोर रहेगा।