Publish Date: Mon, 16 Feb 2026 (14:56 IST)
Updated Date: Mon, 16 Feb 2026 (15:27 IST)
उज्जैन। 17 फरवरी 2026 को साल का पहला सूर्य ग्रहण रहेगा। कार्यालय शासकीय जीवाजी वेधशाला उज्जैन से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार यह सूर्य ग्रहण अंशिक रहेगा और इसकी कुल अवधि 4 घंटे 01 मिनट तक रहेगी। यह सूर्य ग्रहण भारतीय मानक समय अनुसार दोपहर 03 बजकर 26 मिनट और 06 सेकंड से प्रारंभ होकर शाम 07 बजकर 57 मिनट और 06 सेकंड पर समाप्त होगा।
जीवाजी वेधशाला के अनुसार यह सूर्य ग्रहण आंशिक रहेगा और इसी मध्य की स्थिति 05:41:09 बजे रहेगी। इस समय सूर्य का 96.02 प्रतिशत भाग चंद्रमा के द्वारा ढक लिया जाएगा। भारत में यह आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा लेकिन अर्जेंटीना, चिली, दक्षिण अफ्रीका और अंटार्कटिका में बहुत अच्छी तरह से देखा जा सकेगा। हालांकि विदेशी मान्यता के अनुसार यह वलयकार सूर्य ग्रहण होगा जिसे 'रिंग ऑफ फायर' कहते हैं।
सूर्य ग्रहण के मुख्य प्रकार
सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं, जो चंद्रमा की पृथ्वी से दूरी और उसके स्थान पर निर्भर करते हैं:-
1. पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse):
जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढंक लेता है, तो उसे पूर्ण सूर्य ग्रहण कहते हैं। इस दौरान पृथ्वी के एक छोटे हिस्से में दिन के समय भी अंधेरा छा जाता है और सूर्य का बाहरी वातावरण (Corona) दिखाई देने लगता है।
2. आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse):
इसमें चंद्रमा सूर्य के केवल एक हिस्से को ढकता है। सूर्य का कुछ हिस्सा दिखाई देता है और कुछ हिस्सा चंद्रमा के पीछे छिपा रहता है। यह दृश्य 'कटे हुए सेब' जैसा दिखाई देता है।
3. वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse):
यह तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी से दूर होता है और उसका आकार सूर्य को पूरी तरह ढंकने के लिए पर्याप्त नहीं होता। इस स्थिति में सूर्य के बीच का हिस्सा काला हो जाता है और किनारों से रोशनी एक चमकती हुई अंगूठी की तरह दिखाई देती है। इसे 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) भी कहा जाता है।