Hanuman Chalisa

Guru Arjun Dev Ji: गुरु अर्जन देव जी का इतिहास क्या है?

WD Feature Desk
बुधवार, 8 अप्रैल 2026 (10:57 IST)
Fifth Guru of Sikhism: सिख धर्म के पांचवें गुरु, गुरु अर्जन देव जी का इतिहास साहस, आध्यात्मिकता और निस्वार्थ बलिदान की एक अद्वितीय गाथा है। उन्हें 'शहीदों के सरताज' और 'शांतिपुंज' के रूप में पूजा जाता है। यहां उनके प्रकाशोत्सव पर्व पर इतिहास से जुड़ी मुख्य बातें प्रस्तुत हैं:ALSO READ: गुरु हर राय जयंती, जानें महान सिख धर्मगुरु के बारे में 5 खास बातें

 

1. जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

गुरु अर्जन देव जी का जन्म सन् 1563 को पंजाब के गोइंदवाल साहिब में हुआ था। वे चौथे गुरु, गुरु रामदास जी और माता भानी जी के सबसे छोटे पुत्र थे। बचपन से ही उनमें सेवा और भक्ति के गुण विद्यमान थे।
 

2. हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) का निर्माण

अमृतसर में स्वर्ण मंदिर की नींव गुरु अर्जन देव जी ने ही रखवाई थी। इसकी खास बातें ये थीं- उन्होंने इसकी नींव एक मुस्लिम सूफी संत मियां मीर से रखवाई, जो सांप्रदायिक सद्भाव का उदाहरण था। मंदिर में चार दरवाजे बनवाए गए, जिसका अर्थ था कि यह स्थान हर धर्म, जाति और वर्ग के व्यक्ति के लिए खुला है।
 

3. लोक कल्याण के कार्य

नगरों की स्थापना: उन्होंने तरनतारन साहिब, करतारपुर साहिब और श्री हरगोबिंदपुर जैसे नगर बसाए। 
 
कुष्ठ रोगियों की सेवा: उन्होंने तरनतारन में कुष्ठ रोगियों के लिए एक आश्रम बनवाया, जो उस समय एक क्रांतिकारी कदम था।
 
कृषि सुधार: किसानों की सुविधा के लिए उन्होंने कई स्थानों पर कुएं और तालाब खुदवाए।
 

4. मुगल शासक जहांगीर और शहादत

गुरु जी की बढ़ती लोकप्रियता और आदि ग्रंथ के संकलन से मुगल सम्राट जहांगीर ईर्ष्या करने लगा था। जहांगीर ने उन पर बागी राजकुमार खुसरो की मदद करने का आरोप लगाया और उन्हें इस्लाम धर्म अपनाने या भारी जुर्माना भरने का आदेश दिया।
 
गुरु जी ने स्पष्ट रूप से मना कर दिया, जिसके बाद उन्हें अमानवीय यातनाएं दी गईं:
 
उन्हें उबलते पानी में बिठाया गया।
 
तपती हुई रेत उनके शरीर पर डाली गई।
 
उन्हें गर्म लोहे के तवे पर बिठाया गया।
 
इन सब यातनाओं के बीच भी वे अडिग रहे और अंततः 30 मई, 1606 को रावी नदी के ठंडे पानी में स्नान करते हुए ज्योति-जोत समा गए।
 

गुरु जी की सीख:

'तेरा कीआ मीठा लागै, हरि नामु पदारथ नानक मांगै।'

(अर्थात: हे ईश्वर! आपकी रजा मुझे मीठी लगती है, मैं तो बस आपके नाम का दान मांगता हूं।)
 
उनकी शहादत ने सिख इतिहास को पूरी तरह बदल दिया और उनके पुत्र, गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने सिखों में 'मीरी-पीरी' (भक्ति और शक्ति) की परंपरा शुरू की।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Guru Tegh Bahadur: गुरु तेग बहादुर जयंती, जानें सिख धर्म में उनका योगदान

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

वैशाख महीना किन देवताओं की पूजा के लिए है सबसे शुभ? जानें इसका धार्मिक महत्व

ऑपरेशन सिंदूर 2.0: क्या फिर से होने वाला है भारत और पाकिस्तान का युद्ध, क्या कहता है ज्योतिष

महायुद्ध के संकेत! क्या बदलने वाला है कुछ देशों का भूगोल? ज्योतिष की चौंकाने वाली भविष्यवाणी

अक्षय तृतीया पर क्यों होता है अबूझ मुहूर्त? जानिए इसका रहस्य

बैसाखी कब है, क्या है इसका महत्व, जानिए खास 5 बातें

सभी देखें

धर्म संसार

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (8 अप्रैल, 2026)

08 April Birthday: आपको 8 अप्रैल, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 8 अप्रैल 2026: बुधवार का पंचांग और शुभ समय

South Direction Home Vastu Tips: घर की दक्षिण दिशा को इन 5 तरीकों से अशुभता से बचाएं

अक्षय तृतीया आने वाली है, अभी से कर लें ये 6 खास तैयारी

अगला लेख