Bhai Dooj
✕

उज्जैन महाकाल की भस्मारती के 15 राज, जानकर चौंक जाएंगे आप

अनिरुद्ध जोशी
सोमवार, 9 अगस्त 2021 (17:45 IST)
उज्जैन के कालों के काल महाकाल बाबा के मंदिर में प्रतिदिन अलसुबह भस्म आरती होती है। भस्म को शिवजी का वस्त्र माना जाता है। किसी भी पदार्थ का अंतिम रूप भस्म होता है। किसे भी जलाओ तो वह भस्म रूप में एक जैसा ही होगा। मिट्टी को भी जलाओ तो वह भस्म रूप में होगी। सभी का अंतिम स्वरूप भस्म ही है। भस्म इस बात का संकेत भी है कि सृष्टि नश्वर है। शिवजी भस्म धारण करके सभी को यही बताना चाहते हैं कि इस देह का अंतिम सत्य यही है। आओ जानते हैं भस्मारती के 15 रहस्य।
 
 
भस्म आरती के राज :
1. महाकाल की 6 बार आरती होती हैं, जिसमें सबसे खास मानी जाती है भस्‍म आरती।
 
2. सबसे पहले भस्म आरती, फिर दूसरी आरती में भगवान शिव घटा टोप स्वरूप दिया जाता है। तीसरी आरती में शिवलिंग को हनुमान जी का रूप दिया जाता है। चौथी आरती में भगवान शिव का शेषनाग अवतार देखने को मिलता है। पांचवी में शिव भगवान को दुल्हे का रूप दिया जाता है और छठी आरती शयन आरती होती है। इसमें शिव खुद के स्‍वरूप में होते हैं।
 
3. भस्‍म आरती यहां भोर में 4 बजे होती है। 
 
4. इस आरती की खासियत यह है कि इसमें ताजा मुर्दे की भस्म से भगवान महाकाल का श्रृंगार किया जाता है।
 
5. इस आरती में शामिल होने के लिए पहले से बुकिंग की जाती है।
 
6. इस आरती में महिलाओं के लिए साड़ी पहनना जरूरी है। 
 
7. जिस वक्‍त शिवलिंग पर भस्‍म चढ़ती है उस वक्‍त महिलाओं को घूंघट करने को कहा जाता है।
 
 
8. मान्‍यता है कि उस वक्‍त भगवान शिव निराकार स्‍वरूप में होते हैं और इस रूप के दर्शन महिलाएं नहीं कर सकती। 
 
9. पुरुषों को भी इस आरती को देखने के लिए केवल धोती पहननी होती है। वह भी साफ-स्‍वच्‍छ और सूती होनी चाहिए।
 
10. पुरुष इस आरती को केवल देख सकते हैं और करने का अधिकार केवल यहां के पुजारियों को होता है।
11. प्राचीन मान्यताओं के अनुसार दूषण नाम के एक राक्षस की वजह से अवंतिका में आतंक था। नगरवासियों के प्रार्थना पर भगवान शिव ने उसको भस्म कर दिया और उसकी राख से ही अपना श्रृंगार किया। तत्पश्चात गांव वालों के आग्रह पर शिवजी वहीं महाकाल के रूप में बस गए। इसी वजह से इस मंदिर का नाम महाकालेश्‍वर रख दिया गया और शिवलिंग की भस्‍म से आरती की जाने लगी।
 
 
12. ऐसा भी कहते हैं कि यहां श्‍मशान में जलने वाली सुबह की पहली चिता से भगवान शिव का श्रृंगार किया जाता है, परंतु इसकी हम पुष्टि नहीं कर सकते हैं।
 
13. यह भी कहा जाता है कि इस भस्‍म के लिए पहले से लोग मंदिर में रजिस्‍ट्रेशन कराते हैं और मृत्‍यु के बाद उनकी भस्‍म से भगवान शिव का श्रृंगार किया जाता है।
 
14. हालांकि यह भी कहा जाता है कि श्रौत, स्मार्त और लौकिक ऐसे तीन प्रकार की भस्म कही जाती है। श्रुति की विधि से यज्ञ किया हो वह भस्म श्रौत है, स्मृति की विधि से यज्ञ किया हो वह स्मार्त भस्म है तथा कण्डे को जलाकर भस्म तैयार की हो तो वह लौकिक भस्म कही जाती है। विरजा हवन की भस्म सर्वोत्कृष्ट मानी है।
 
 
15. हवन कुंड में पीपल, पाखड़, रसाला, बेलपत्र, केला व गऊ के गोबर को भस्म (जलाना) करते हैं। इस भस्म की हुई सामग्री की राख को कपड़े से छानकर कच्चे दूध में इसका लड्डू बनाया जाता है। इसे सात बार अग्नि में तपाया और फिर कच्चे दूध से बुझाया जाता है। इस तरह से तैयार भस्मी को समय-समय पर लगाया जाता है। यही भस्मी नागा साधुओं का वस्त्र होता है। इसी तरह की भस्म से आरती भी होती है।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 06 नवंबर 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

Narak Chaturdashi 2026: नरक चतुर्दशी पर कब करें पूजा और अभ्यंग स्नान? जानें सटीक शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री, विधि और कथा

Diwali 2026: दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त, नोट करें संपूर्ण पूजन विधि, सामग्री और कथा

नरक चतुर्दशी पर इस मुहूर्त में करें हनुमान पूजा, सभी संकट हो जाएंगे दूर, नरक के भय से मिलेगी मुक्ति

Diwali 2026: दिवाली की रात भूलकर भी न करें ये 5 तांत्रिक प्रयोग, हो सकता है भारी नुकसान

सभी देखें

धर्म संसार

Diwali 2026: दिवाली की रात चुपचाप कर लें ये 5 गुप्त प्रयोग, साल भर होगी अपार धन की वर्षा

धनतेरस पर आरोग्य की पूजा करें, अपने डॉक्टर को धन्यवाद दें

Dhanteras 2026: धनतेरस पर इस सरल विधि से करें भगवान धन्वंतरि की पूजा, नोट करें सटीक शुभ मुहूर्त और सामग्री

मंगल गोचर 2026: सिंह राशि में आ रहे हैं ग्रहों के सेनापति, इन 5 राशियों पर बरसेगी विशेष कृपा

धनतेरस पर इन चीजों की है सबसे ज्यादा मांग, बर्तन-सोने के साथ छाए ये नए ट्रेंड्स, जानें क्या खरीद रहे हैं लोग?

अगला लेख