Publish Date: Wed, 30 Sep 2026 (13:41 IST)
Updated Date: Wed, 30 Sep 2026 (13:46 IST)
सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध पक्ष का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन उन सभी ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों के निमित्त धार्मिक कर्म किए जाते हैं, जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात न हो या जिनका श्राद्ध किसी कारणवश छूट गया हो। शास्त्रों के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या पर श्रद्धापूर्वक किए गए कार्यों से पितृ तृप्त होकर सुख, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद देते हैं। इस पवित्र तिथि पर पितरों की प्रसन्नता के लिए किए जाने वाले प्रमुख कर्मों का व्यवस्थित विवरण नीचे दिया गया है:-
1. पिंडदान, तर्पण एवं पूजन कर्म
पिंडदान एवं मोक्ष कर्म: किसी पवित्र नदी के तट पर अथवा घर में ही पवित्रतापूर्वक विधि-विधान से पिंडदान करें। यह कर्म पितरों को मोक्ष प्रदान करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
तिल एवं जल से तर्पण: हाथ में जल, कुश (पवित्र घास) और काले तिल लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करें। ऐसा करने से पितर पूरी तरह तृप्त होते हैं।
पीपल वृक्ष की पूजा: पीपल के पेड़ में पितरों का वास माना गया है। इस दिन पीपल की जड़ में जल अर्पित करें, धूप-दीप जलाएं और सात बार परिक्रमा करें।
संध्या दीपक एवं मार्ग दर्शन: शाम के समय घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर तिल के तेल का दीपक जलाएं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दीपक पितरों को उनके लोक लौटने का मार्ग दिखाता है।
2. धूप, आहुति एवं पंचबलि कर्म
कंडे पर गुड़-घी की धूप: मध्याह्न काल (दोपहर) के समय मिट्टी के कंडे या उपले को सुलगाकर उस पर गुड़ और शुद्ध देसी घी मिलाकर धूप दें।
अग्नि में अन्न आहुति: घर में बना सात्विक भोजन कंडे की अग्नि पर अर्पित करें और सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के नाम से धूप दें।
पंचबलि (जीव-जंतुओं को भोजन): शास्त्रों में गाय, कौए, कुत्ते और चींटियों में पितरों का अंश माना गया है। भोजन से पूर्व इनके लिए हिस्सा निकालकर गाय को हरा चारा व रोटी दें, तथा कौए, कुत्ते व चींटियों को भोजन कराएं।
3. ब्राह्मण भोज एवं दान-दक्षिणा
योग्य ब्राह्मणों को आमंत्रण: अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार 1, 3, 5, 11 या 21 योग्य एवं सात्विक ब्राह्मणों को आदरपूर्वक घर बुलाएं।
भरपेट भोजन एवं सम्मान: ब्राह्मणों को भरपेट सात्विक भोजन कराएं और अंत में यथाशक्ति वस्त्र एवं दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लें।
काले तिल का दान: श्राद्ध कर्म में काले तिल का विशेष महत्व है। इस दिन काले तिल का दान करने से पितृ दोष शांत होता है।
महादान एवं वस्त्र दान: गरीबों और जरूरतमंदों को अपनी क्षमतानुसार अन्न, वस्त्र, जूते-चप्पल, छाता, कंबल, औषधि, गुड़, नमक, तिल, दीप या धन का दान करें।
4. पाठ एवं आध्यात्मिक कर्म
श्रीमद्भागवत गीता का पाठ: सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्रीमद्भागवत गीता के सातवें अध्याय का पाठ करना या सुनना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इससे पितरों की आत्मा को परम शांति और मोक्ष प्राप्त होता है।
इन सभी नियमों और उपायों को सच्चे मन, पवित्रता और अटूट श्रद्धा के साथ करने से पितृ दोष दूर होता है और जीवन में सुख, शांति तथा वंश वृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।