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श्री शनिदेव जयंती : 16 अनजानी बातें

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-हिमांशु राठौड़
 
* सूर्यपुत्र श्री शनिदेव मृत्युलोक के ऐसे स्वामी हैं, अधिपति हैं, जो समय आने पर व्यक्ति के अच्‍छे-बुरे कर्मों के आधार पर सजा देकर सुधारने के लिए प्रेरित करते हैं। 
 
* शनि आधुनिक युग के न्यायाधीश हैं और न्याय हमेशा अप्रिय होता है इसलिए उसे क्रूर समझते हैं।
 
* शनिदेव का काला रंग ही ऐसा रंग है, जिस पर दूजा रंग नहीं चढ़ता है। 
 
* शनि का धातु लौह-इस्पात है, जो सबसे अधिक उपयुक्त तथा शक्तिशाली है। 
 
* शनि की प्रिय वस्तुएं- तेल, कोयला, लौह, काला तिल, उड़द, जूता, चप्पल दान के रूप में प्रदान किया जाता है। 
 
* शनिदेव की स्थापना में- समय तथा श्रम का आंशिक दान सर्वोत्तम दान है। 
 
* श्री शनिदेव अध्यात्म के मालिक हैं, किसी भी आराधना, साधना, सिद्धि हेतु शनिदेव की उपासना परमावश्यक है। 
 
* श्री शनिदेव संगठन के मालिक हैं, अत: उनकी कृपा बिना संयुक्त परिवार की कल्पना ही असंभव है। 
 
* शनिदेव सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, प्रशासनिक, विद्या, व्यापार आदि में स्थापित ऊंचाई देने का कार्य करते हैं। 
 
* शनिदेव रोगमुक्ति तथा आयुवृद्धि की सदैव कामना करते हैं। 
 
* शनिदेव कलियुग का साक्षात भगवान हैं। 
 
* शनिदेव के अनेक नाम हैं तथा उनका कार्यक्षेत्र विस्तृत तथा विशाल है। 
 
* शनिदेव से राजा से लेकर रंक तक प्रभावित तथा डरे हुए रहते हैं। 
 
*  शनिदेव नश्वर जगत का एक शाश्वत असामान्य देव है। 
 
* शनि का वाहन गिद्ध तथा रथ लोहे का बना हुआ है। (मत्स्यपुराण 127.8)
 
* शनिदेव का आयुध- धनुष्य बाण और त्रिशूल है। 

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