ramcharitmanas
✕

विष्णु के इन 5 अवतारों के नाम नहीं जानते होंगे आप

अनिरुद्ध जोशी
भगवान श्रीविष्णु के 24 से अधिक अवतार लिए हैं। उनमें से 5 अवतार ऐसे हैं जिनके बारे में लोग कम ही जानते होंगे। हालांकि बहुतों ने तो नाम भी नहीं सुना होगा। यहां ऐसे ही 5 अवतारों की संक्षिप्त जानकारी।
 
 
1.यज्ञ : भगवान विष्णु के सातवें अवतार का नाम यज्ञ है। धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान यज्ञ का जन्म स्वायम्भुव मन्वन्तर में हुआ था। स्वायम्भुव मनु की पत्नी शतरूपा के गर्भ से आकूति का जन्म हुआ। वे रूचि प्रजापति की पत्नी हुई। इन्हीं आकूति के यहां भगवान विष्णु यज्ञ नाम से अवतरित हुए।

ALSO READ: भगवान विष्णु के किस अवतार का जन्म कहां और कब हुआ, जानिए
भगवान यज्ञ के उनकी धर्मपत्नी दक्षिणा से अत्यंत तेजस्वी बारह पुत्र उत्पन्न हुए। वे ही स्वायम्भुव मन्वन्तर में याम नामक बारह देवता कहलाए। भागवत पुराण, देवी भागवत और गरुड़ पुराण के अनुसार यज्ञ को आदि-नारायण का अवतार माना गया है स्वयंभुव मन्वंतर के समय में कोई योग्य इंद्र नही था ,इसलिए भगवान् नारायण यज्ञ के रूप में अवतारित होकर स्वर्ग के राजा बनेI 
 
2-आदिराज पृथु : भगवान विष्णु के एक अवतार का नाम आदिराज पृथु है। धर्म ग्रंथों के अनुसार स्वायम्भुव मनु के वंश में अंग नामक प्रजापति का विवाह मृत्यु की मानसिक पुत्री सुनीथा के साथ हुआ। उनके यहां वेन नामक पुत्र हुआ। उसने भगवान को मानने से इंकार कर दिया और स्वयं की पूजा करने के लिए कहा।
 
तब महर्षियों ने मंत्र पूत कुशों से उसका वध कर दिया। तब महर्षियों ने पुत्रहीन राजा वेन की भुजाओं का मंथन किया, जिससे पृथु नाम पुत्र उत्पन्न हुआ। पृथु के दाहिने हाथ में चक्र और चरणों में कमल का चिह्न देखकर ऋषियों ने बताया कि पृथु के वेष में स्वयं श्रीहरि का अंश अवतरित हुआ है।
 
3- हयग्रीव अवतार : धर्म ग्रंथों के अनुसार एक बार मधु और कैटभ नाम के दो शक्तिशाली राक्षस ब्रह्माजी से वेदों का हरण कर रसातल में पहुंच गए। वेदों का हरण हो जाने से ब्रह्माजी बहुत दु:खी हुए और भगवान विष्णु के पास पहुंचे। तब भगवान ने हयग्रीव अवतार लिया। इस अवतार में भगवान विष्णु की गर्दन और मुख घोड़े के समान थी। तब भगवान हयग्रीव रसातल में पहुंचे और मधु-कैटभ का वध कर वेद पुन: भगवान ब्रह्मा को दे दिए।
ALSO READ: विष्णु ने ये 6 छल क्यों किए? जानकर चौंक जाएंगे
4- हंस अवतार : एक बार भगवान ब्रह्मा अपनी सभा में बैठे थे। तभी वहां उनके मानस पुत्र सनकादि पहुंचे और भगवान ब्रह्मा से मनुष्यों के मोक्ष के संबंध में चर्चा करने लगे। तभी वहां भगवान विष्णु महाहंस के रूप में प्रकट हुए और उन्होंने सनकादि मुनियों के संदेह का निवारण किया। इसके बाद सभी ने भगवान हंस की पूजा की। इसके बाद महाहंसरूपधारी श्रीभगवान अदृश्य होकर अपने पवित्र धाम चले गए।
 
5- कपिल मुनि : भगवान विष्णु ने पांचवा अवतार कपिल मुनि के रूप में लिया। इनके पिता का नाम महर्षि कर्दम व माता का नाम देवहूति था। शरशय्या पर पड़े हुए भीष्म पितामह के शरीर त्याग के समय वेदज्ञ व्यास आदि ऋषियों के साथ भगवा कपिल भी वहां उपस्थित थे। भगवान कपिल के क्रोध से ही राजा सगर के साठ हजार पुत्र भस्म हो गए थे। भगवान कपिल सांख्य दर्शन के प्रवर्तक हैं। कपिल मुनि भागवत धर्म के प्रमुख बारह आचार्यों में से एक हैं।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

धर्म संसार

Shukra Gochar 2026: 24 अक्टूबर से बदलेगी किस्मत! शुक्र का नक्षत्र परिवर्तन इन 7 राशियों को बनाएगा धनवान

Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा 2026 में कब है, 25 या 26 अक्टूबर को?

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 23 अक्‍टूबर 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

कब रखा जाएगा आश्विन पूर्णिमा व्रत? क्‍या है इसका महत्‍व? जानिए पूजा विधि और नियम

शरद पूर्णिमा 2026: मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने और धन-समृद्धि पाने के 5 महाउपाय

अगला लेख