Publish Date: Thu, 25 Mar 2021 (09:35 IST)
Updated Date: Thu, 25 Mar 2021 (09:37 IST)
कात्यायन नाम से कालांतर में कई ऋषि हुए हैं। एक विश्वामिंत्र के वंश में जिन्होंने श्रोत, गृह्य और प्रतिहार सूत्रों की रचना की थी, दूसरे गोमिलपुत्र थे जिन्होंने 'छंदोपरिशिष्टकर्मप्रदीप' की रचना की थी और तीसरे कात्यायन वररुचि सोमदत्त के पुत्र थे जो पाणिनीय सूत्रों के प्रसिद्ध वार्तिककार थे।
कात्यायन कत ऋषि के गोत्र में उत्पन्न ऋषियों को कहा गया है। सबसे पहले कत नामक महर्षि के पुत्र ऋषि कात्य हुए। इन्हीं कात्य के गोत्र में विश्व प्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए जिन्होंने भगवती जगदम्बा की कई वर्षों तक कठिन तपस्या की थी जिससे प्रसन्न होकर जगदम्बा ने कात्यायन ऋषि की इच्छानुसार उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लेकर महिषासुर का वध किया था।
भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्हीं की पूजा कालिन्दी यमुना तट पर की थी। ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं
ऋषि कात्यायन की पुत्री होने के कारण वे कात्यायनी कहलाईं। यह नवदुर्गा में से एक षष्ठी देवी है। कात्यायन ऋषि को विश्वामित्रवंशीय कहा गया है। स्कंदपुराण के नागर खंड में कात्यायन को याज्ञवल्क्य का पुत्र बतलाया गया है। उन्होंने 'श्रौतसूत्र', 'गृह्यसूत्र' आदि की रचना की थी। जो एक मैत्रेय गोत्र आता है वह भी विश्वामित्र से संबंधित है।