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साईबाबा के माता-पिता का नाम जानिए...

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shirdi ke sai baba
महाराष्ट्र के पाथरी (पातरी) गांव में साईंबाबा का जन्म 27 सितंबर 1830 को हुआ था। साई के जन्म स्थान पाथरी (पातरी) पर एक मंदिर बना है। मंदिर के अंदर साई की आकर्षक मूर्ति रखी हुई है। यह बाबा का निवास स्थान है, जहां पुरानी वस्तुएं जैसे बर्तन, घट्टी और देवी-देवताओं की मूर्तियां रखी हुई हैं।

मंदिर के व्यवस्थापकों के अनुसार यह साईबाबा का जन्म स्थान है। उनके अनुसार साई के पिता का नाम गोविंद भाऊ और माता का नाम देवकी अम्मा है। कुछ लोग उनके पिता का नाम गंगाभाऊ बताते हैं और माता का नाम देवगिरी अम्मा। कुछ हिन्दू परिवारों में जन्म के समय तीन नाम रखे जाते थे इसीलिए बीड़ इलाके में उनके माता-पिता को भगवंत राव और अनुसूया अम्मा भी कहा जाता है। वे यजुर्वेदी ब्राह्मण होकर कश्यप गोत्र के थे। कुछ इन्हें भारद्वाज गोत्र का मानते हैं। साई के चले जाने और पिता के देहांत के बाद उनके परिवार के ‍लोग हैदराबाद चले गए थे और फिर उनका कोई अता-पता नहीं चला। लेकिन अब पता चल गया है। उनके भाई का परिवार आज भी हैदराबाद में रहता है।

शशिकांत शांताराम गडकरी की किताब 'सद्‍गुरु सांई दर्शन' (एक बैरागी की स्मरण गाथा) अनुसार साई ब्राह्मण परिवार के थे। उनका परिवार वैष्णव ब्राह्मण यजुर्वेदी शाखा और कोशिक गोत्र का था। उनके पिता का नाम गंगाभाऊ और माता का नाम देवकीगिरी था। दे‍वकिगिरी के पांच पुत्र थे। पहला पुत्र रघुपत भुसारी, दूसरा दादा भूसारी, तीसरा हरिबाबू भुसारी, चौथा अम्बादास भुसारी और पांचवें बालवंत भुसारी थे। साई बाबा गंगाभाऊ और देवकी के तीसरे नंबर के पुत्र थे। उनका नाम था हरिबाबू भूसारी। साईं के भाई के पुत्र और पौत्र अभी भी हैदराबाद में रहते हैं।

साईबाबा के इस जन्म स्थान के पास ही भगवान पांडुरंग का मंदिर है। इसी मंदिर के बाईं और देवी भगवती का मंदिर है जिसे लोग सप्तश्रृंगीदेवी का रूप मानते हैं। इसी मंदिर के पास चौधरी गली में भगवान दत्तात्रेय और सिद्ध स्वामी नरसिंह सरस्वती का भी मंदिर है, जहां पवित्र पादुका का पूजन होता है। लगभग सभी मराठी भाषियों में नरसिंह सरस्वती का नाम प्रसिद्ध है।

थोड़ी ही दूरी पर राजाओं के राजबाड़े हैं। यहां से एक किलोमीटर दूर साईबाबा का पारिवारिक मारुति मंदिर है। सांई बाबा का परिवार हनुमान भक्त था। वे उनके कुल देवता हैं। यह मंदिर खेतों के मध्य है, जो मात्र एक गोल पत्थर से बना है। यहीं पास में एक कुआं है, जहां साईबाबा स्नान कर मारुति का पूजन करते थे। साईबाबा पर हनुमानजी की कृपा थी।- अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'

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