biodatamaker
✕

कविता : तुम्हारी एक छुअन...

सलिल सरोज
क्या था तुम्हारी उस एक छुअन में,
कि वो शाम याद आती है, तो जाती नहीं।
 
अजब-सा खुमार था तुम्हारे सुरूर का,
जो आग लगाती है, पर जलाती नहीं।
 
इबादत कुछ और भी हो सकती थी क्या,
जो मुझे खुदा बनाती है, और बताती नहीं।
 
गर था यूं ही आंखों से ही पिलाना,
तो आगोश में सुला के, फिर जगाती ही नहीं।
 
हुआ नहीं बेचैन कभी इस कदर,
तेरे बगैर दिल धड़कता है, पर सांस आती नहीं।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

नवीनतम

मीराबाई जयंती 2026: क्या कृष्ण भक्ति में लीन मीरा सचमुच मूर्ति में समा गई थीं? जानिए उनकी जिंदगी के 5 अनोखे रहस्य!

मूर्खता भी बन सकती है कृत्रिम बुद्धिमत्ता, AI पर क्यों आमने-सामने हैं अमेरिका और चीन

कब मनाया जाएगा आचार्य विद्यासागर का जन्‍मोत्‍सव, जानिए उनके जीवन से जुड़ी खास बातें...

कौन थे महर्षि वाल्मीकि? कब मनाई जाएगी उनकी जयंती? जानिए उनके बारे में रोचक बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शक्ति और सामर्थ्य से सार्थक हो रहा है भारत

अगला लेख