वो गया दफ़अतन कई बार मुझे छोड़के, पर लौटकर फिर मुझ में ही आता रहा। कुछ तो मजबूरियां थीं उसकी अपनी भी, पर चोरी-छिपे ही मोहब्बत निभाता रहा। कई सावन से तो वो भी बेइंतहा प्यासा है, आंखों के इशारों से ही प्यास बुझाता रहा। पुराने खतों...