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प्रेम गीत : मन का संगीत...

राकेश श्रीवास्तव 'नाजुक'
मन का संगीत मिटने न देना कभी,
वरना जीवन का पहिया उलझ जाएगा।
 
प्यार के आचमन का मुहूरत नहीं, 
जब भी जी चाहे अपना बना लीजिए।
फर्क इसका नहीं कौन इससे रंगा,
जो रंगा उसको दिल से लगा लीजिए।
 
प्यार का ही असर दर्द है बेअसर, 
प्रश्न जितना कठिन हो सुलझ जाएगा।
मन का संगीत मिटने न देना कभी, 
वरना जीवन का पहिया उलझ जाएगा।
 
काल का चक्र रुकता नहीं है कभी, 
जानते हैं सभी कौन है मानता।
वक्त का हाथ जो वक्त पर थाम ले, 
उसको सारा जमाना है पहचानता।
 
नींद से जागकर खिड़कियां खोल दो, 
वरना हाथों से अवसर निकल जाएगा।
मन का संगीत मिटने न देना कभी, 
वरना जीवन का पहिया उलझ जाएगा।
 
कोई नयनों से निंदिया चुरा ले गया, 
कैसे ख्वाबों से नजरें मिलाएंगे हम।
गीत के सारे बंदों में सिलवट पड़ी, 
चांद का रूप कैसे सजाएंगे हम।
 
आप बोलें न बोलें मगर आईना, 
आपको देखकर सब समझ जाएगा।
मन का संगीत मिटने न देना कभी, 
वरना जीवन का पहिया उलझ जाएगा।

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