डॉ. रूपेश जैन राहततुम्हे प्यार नहीं तो क्या मुझको दीवाना कह लो उम्मीदे वफ़ा नहीं तो क्या मुझको दीवाना कह लो। धूं धूं जलते अंतर्मन में, प्राण अभी बाकी रह गए अस्तित्व बिखरने को था, ठोकर खाकर सम्हल गए। दे जाती हो मृगतृष्णा तो क्या मुझको दीवाना कह...