Publish Date: Sat, 18 Jan 2025 (10:50 IST)
Updated Date: Sat, 18 Jan 2025 (10:48 IST)
Republic Day 2025: भारतीय तिरंगा भारत का राष्ट्रीय ध्वज है। यह देश की एकता, अखंडता और गौरव का प्रतीक है। तिरंगा तीन रंगों – केसरिया, सफेद और हरे – से बना है और बीच में एक नीले रंग का चक्र है। इन रंगों और चक्र का अपना-अपना महत्व है। आइए जानिए तिरंगे के इतिहास, इसके रंगों और प्रतीकों का क्या महत्व है और तिरंगे से जुड़े नियम क्या हैं।
तिरंगे के रंगों का महत्व
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केसरिया: यह रंग देश की शक्ति, साहस और त्याग का प्रतीक है।
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सफेद: यह रंग शांति, सत्य और पवित्रता का प्रतीक है।
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हरा: यह रंग समृद्धि, उर्वरता और जीवन का प्रतीक है।
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नीला चक्र: यह अशोक चक्र कहलाता है और यह धर्म और शांति का प्रतीक है।
तिरंगे का इतिहास
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पहला तिरंगा: भारत का पहला राष्ट्रीय ध्वज 7 अगस्त 1906 को कलकत्ता में फहराया गया था।
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आधुनिक तिरंगा: वर्तमान तिरंगे को आंध्र प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकया ने डिजाइन किया था।
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संविधान सभा द्वारा अपनाया गया: भारत की संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को वर्तमान तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया था।
तिरंगे से जुड़े नियम
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तिरंगा हमेशा खादी, कॉटन या सिल्क का बना होना चाहिए।
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तिरंगे को कमर के नीचे किसी परिधान के रूप में पहनना मना है।
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भारतीय अपने वाहन पर तिरंगा नहीं फहरा सकते।
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तिरंगे को तोड़ना, मोड़ना, जलाना और जमीन पर फेंकना अपराध है।
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भारत के संविधान में फ्लैग कोड ऑफ इंडिया नाम का एक कानून है, जिसका उल्लंघन करने वाले को सजा का प्रावधान है।
तिरंगा भारत के लिए सिर्फ एक झंडा नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय गौरव, एकता और अखंडता का प्रतीक है। यह हमें हमारे इतिहास, संस्कृति और मूल्यों की याद दिलाता है।
भारतीय तिरंगा देश के हर नागरिक के लिए सम्मान का प्रतीक है। हमें तिरंगे के प्रति सम्मान और आदर का भाव रखना चाहिए और इसके नियमों का पालन करना चाहिए।