Publish Date: Fri, 07 Mar 2025 (14:22 IST)
Updated Date: Fri, 07 Mar 2025 (14:23 IST)
इस दौरान सभी तरह के मांगलिक तथा शुभ कार्य लगभग वर्जित माने जाते हैं। पंचाग के अनुसार यह समय सौरमास का होता है जिसे खरमास कहा जाता है। एक मान्यता के अनुसार खरमास में खर का अर्थ 'दुष्ट' होता है और मास का अर्थ महीना होता है।
इसकी कथा कुछ इस प्रकार है...
पौराणिक जानकारी के अनुसार भगवान सूर्य देव 7 घोड़ों के रथ पर सवार होकर लगातार ब्रह्मांड की परिक्रमा करते रहते हैं। उन्हें कहीं पर भी रुकने की इजाजत नहीं है, क्योंकि उनके रुकते ही जनजीवन ठहर जाने की संभावना होती है। लेकिन उनके रथ में जो घोड़े जुते होते हैं, वे लगातार चलने व विश्राम न मिलने के कारण भूख-प्यास से बहुत थक जाते हैं।
फिर सूर्य देव घोड़ों को पानी पीने तथा विश्राम देने के लिए छोड़ देते हैं और खर/ गधों को अपने रथ में जोड़ लेते हैं। अब घोड़ा, घोड़ा होता है और गधा, गधा अर्थात् रथ की गति धीमी हो जाती है फिर भी जैसे-तैसे एक मास का चक्र पूरा होता है, तब तक घोड़ों को भी विश्राम मिल चुका होता है। इस तरह यह क्रम चलता रहता है और हर सौरवर्ष में एक सौरमास 'खरमास' कहलाता है।
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