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क्या महत्व है छोटा चार धाम की यात्रा का, जानिए

अनिरुद्ध जोशी
हिन्दू सनातन धर्म में चार धाम की यात्रा का बहुत ही महत्व है। मई माह में अक्सर चार धाम की यात्रा प्रारंभ होने के बारे में हम सुनते आएं हैं। परंतु यह चार धाम की यात्रा नहीं बल्कि एक धाम की ही यात्रा रहती है। आओ जानते हैं कि बड़ा चार धाम और और छोटा चार धाम यात्रा क्या है।
 
 
बड़ा चार धाम : बद्रीनाथ (उत्तराखंड), द्वारिका (गुजरात), जगन्नाथपुरी (ओड़िसा) और रामेश्वर (तमिलनाडु) को बड़ा चार धाम कहते हैं। हिन्दू धर्म में इसी की यात्रा का खास महत्व है। प्रत्येक हिन्दू को अपने जीवन में इन धामों की यात्रा जरूर करना चाहिए।
 
छोटा चार धाम : बद्रीनाथ धाम में ही केदारनाथ (शिव ज्योतिर्लिंग), यमुनोत्री (यमुना का उद्गम स्थल) एवं गंगोत्री (गंगा का उद्गम स्थल) शामिल हैं। इनकी यात्रा को छोटा चार धाम यात्रा कहते हैं। बद्रीनाथ में तीर्थयात्रियों की अधिक संख्या और इसके उत्तर भारत में होने के कारण यहां के वासी इसी की यात्रा को ज्यादा महत्व देते हैं इसीलिए इसे छोटा चार धाम भी कहा जाता है। 
 
क्यों महत्व रखता है छोटा चार धाम : उक्त चारों ही स्थान पर दिव्य आत्माओं का निवास माना गया है। यह बहुत ही पवित्र स्थान माने जाते हैं। केदारनाथ को जहां भगवान शंकर का आराम करने का स्थान माना गया है वहीं बद्रीनाथ को सृष्टि का आठवां वैकुंठ कहा गया है, जहां भगवान विष्णु 6 माह निद्रा में रहते हैं और 6 माह जागते हैं। यहां बदरीनाथ की मूर्ति शालग्रामशिला से बनी हुई, चतुर्भुज ध्यानमुद्रा में है। यहां नर-नारायण विग्रह की पूजा होती है और अखण्ड दीप जलता है, जो कि अचल ज्ञानज्योति का प्रतीक है।
 
केदार घाटी में दो पहाड़ हैं- नर और नारायण पर्वत। विष्णु के 24 अवतारों में से एक नर और नारायण ऋषि की यह तपोभूमि है। उनके तप से प्रसन्न होकर केदारनाथ में शिव प्रकट हुए थे। दूसरी ओर बद्रीनाथ धाम है जहां भगवान विष्णु विश्राम करते हैं। कहते हैं कि सतयुग में बद्रीनाथ धाम की स्थापना नारायण ने की थी। भगवान केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद बद्री क्षेत्र में भगवान नर-नारायण का दर्शन करने से मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे जीवन-मुक्ति भी प्राप्त हो जाती है। इसी आशय को शिवपुराण के कोटि रुद्र संहिता में भी व्यक्त किया गया है।
 

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