Publish Date: Sat, 04 Jul 2026 (14:45 IST)
Updated Date: Mon, 06 Jul 2026 (14:29 IST)
कश्मीर की कुछ ऐसी रहस्यमयी गुफाएं हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि इनका दूसरा सिरा 4,000 किलोमीटर दूर सीधा रूस तक जाता है। पीर पंजाल केव: यहाँ एक प्राचीन और पवित्र शिवलिंग स्थापित है। शिव खाड़ी: यह भी जम्मू में स्थित शिव आराधना का एक प्रमुख केंद्र है और अमरनाथ गुफा जो श्रीनगर से 3 घंटे की दूरी पर स्थित है। चलिए जानते हैं अमरनाथ गुफा के बारे में रोचक बातें।
बाबा अमरनाथ: यात्रा और भौगोलिक स्थिति
लोकेशन व आकार: श्रीनगर से 145 किमी दूर, समुद्र तल से 3,978 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह गुफा 150 फीट ऊंची और 90 फीट लंबी है।
यात्रा मार्ग: इसके दो रास्ते हैं- पहला पहलगाम और दूसरा सोनमर्ग बालटाल। इन बेस कैंप्स तक पहुंचने के बाद आगे की चढ़ाई पैदल तय की जाती है।
अमरनाथ गुफा के 6 बड़े रहस्य
1. पुण्य का महासागर: पुराणों के अनुसार, अमरनाथ के दर्शन से काशी से 10 गुना, प्रयाग से 100 गुना और नैमिषारण्य से 1,000 गुना अधिक पुण्य मिलता है।
2. 'अमरेश्वर' बनाम बाबा बर्फानी: इस शिवलिंग का वास्तविक नाम 'अमरेश्वर' है। यह यात्रा हिंदू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर पूरे सावन महीने (रक्षाबंधन तक) चलती है।
3. शिव का प्रथम आगमन: मान्यता है कि भगवान शिव स्वयं श्रावण मास की पूर्णिमा को पहली बार इस गुफा में आए थे, इसीलिए इस दिन 'छड़ी मुबारक' को हिमशिवलिंग के पास स्थापित किया जाता है।
4. चंद्रकला से निर्मित ठोस बर्फ: गुफा के केंद्र में टपकने वाली बूंदों से पहले बर्फ का बुलबुला बनता है, जो 15 दिनों तक चंद्रमा के बढ़ने के साथ बढ़ता है और घटने के साथ विलीन हो जाता है। यह अद्भुत शिवलिंग ठोस बर्फ का होता है, जबकि अन्य जगहों की बर्फ हाथ लगाते ही भुरभुरा जाती है। पास में ही गणेश, भैरव और पार्वती के हिमखंड भी बनते हैं।
5. अमरकथा और अमर पक्षी: इसी गुफा में शिवजी ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य सुनाया था। इस कथा को एक तोते (शुकदेव ऋषि) और दो कबूतरों ने भी सुन लिया था। वो कबूतर आज भी अमर होकर इस गुफा में श्रद्धालुओं को दिखाई देते हैं।
6. शिवजी का 'त्याग' मार्ग: पहलगाम में नंदी को, चंदनवाड़ी में माथे के चंदन और चंद्रमा को, पिस्सू टॉप पर पिस्सुओं (पिशाचों) को, शेषनाग झील में गले के नाग को और पंचतरणी में पांचों विधाओं एवं तत्वों और जटाओं से गंगा को छोड़ दिया था। हालांकि पुराणों में इसका उल्लेख अलग-अलग मिलता है।
गुफा का पौराणिक व ऐतिहासिक सफ़र
भृगु ऋषि की खोज: पौराणिक कथा के अनुसार, जब ऋषि कश्यप ने जलमग्न कश्मीर घाटी का पानी नदियों के जरिए बाहर निकाला, तब सबसे पहले भृगु ऋषि ने हिमालय की कंदराओं में इस पवित्र गुफा और शिवलिंग के दर्शन किए थे।
उम्र का रहस्य: पुरातत्व विभाग इसे 5,000 वर्ष पुराना (महाभारत कालीन) मानता है, लेकिन हिमालय के इतिहास को देखते हुए यह गुफा हिमयुग (12 से 13 हजार वर्ष पूर्व) की हो सकती है।
ऐतिहासिक प्रमाण: महाभारत और बौद्ध काल के अलावा, कल्हण की 'राजतरंगिनी' में जिक्र है कि 34 ईस्वी पूर्व कश्मीर के राजा सामदीमत पहलगाम के वनों में स्थित इस बर्फ के शिवलिंग की पूजा करने आते थे। बृंगेश संहिता और नीलमत पुराण में भी इसका गौरवशाली इतिहास दर्ज है।
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अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं।
दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।....
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