Hanuman Chalisa

Covid 19 : लॉकडाउन में घर में ही अपने दिवंगतों के लिए कैसे करें उत्तरकार्य, जानिए

अनिरुद्ध जोशी
कोरोना महामारी के संकट के चलते कई जगहों पर लॉकडाउन लगा हुआ है। ऐसे में यदि किसी के यहां उसके परिजनों की मृत्यु हो जाती है तो नदी या घाट पर उत्तरकार्य अर्थात दशाकर्म आदि अंतिम क्रियाएं करने पर भी प्रतिबंध लगा हुआ है। ऐसे में घर में ही सामान्य तरीके से उत्तर कार्य संपन्न किए जा सकते हैं। आओ जानते हैं इस संबंध में संक्षिप्त जानकारी।
 
 
1. अंतिम संस्कार के बाद दूसरे दिन अस्थि संचय करते हैं और उसी दिन कुछ अस्थियां रखकर बाकी की अस्थियां नदी में प्रवाहित कर देते हैं। 

ALSO READ: कोरोनाकाल में प्रियजन की विदाई : महामारी से दिवंगत के अंतिम संस्कार पर क्या कहते हैं शास्त्र
2. इसके बाद दाह संस्कार करने वाला प्रतिदिन 4 बाटी बनाकर कंडे अर्थात उपले पर सेंक कर एक बाटी को चूरकर उसमें घी और गुड़ मिलाकर छोटे छोटे 5 कोल से कंडे पर धूप दें। बाकी बची अन्न से पांच कोल अलग निकालें जो गाय, श्वान, काग, पितृ और मृतक का होता है। दसवें तक यही कार्य करें।
 
 
3. तीसरे दिन उठावने के लिए मंदिर में सीधा रखते हैं जिसमें गुड़, घी, आटा, नमक आदि होता है। सीधा को पत्तल या थाली सहित ही मंदिर में दान कर देते हैं।
 
4. दसवें दिन घाट पर कर्मविधि संपादित नहीं हो पाए तो ग्रृहृयसुत्रों के अनुसार घर को गोमूत्र और गंगाजल इत्यादि से शुद्ध करें। स्नान करने के बाद घर में ही केशदान या मुंडन करें और फिर पुन: स्नान करें। इसके बाद दिवंगत के चित्र के सामने दीपक जलाकर फिर गर्म उपले पर गुड़ और घी धूप दें।
 
 
5. एकादश अर्थात ग्वारहवें के दिन पके हुए चावल में घी, गुड़ या शक्कर मिलाकर धूप देवें और गो, काग, श्वान, पितृ और दिवंगत को ग्रास दें।
 
6. मंगलश्राद्ध के दिन पायस खीर बनाकर चार भाग गाय, श्वान, अतिथि एवं कागवास कौए के लिए निकालकर खीर की धूप देना चाहिए।
 
7. फिर घर में ही यथासंभव समयानुसार श्राद्ध कर्म संपादित करें और पगड़ी की रस्म करें। अंत में जब भी समय अच्छा हो, सामान्य हो तब पवित्र नदी के किनारे पंडितों से पिंडदान, तर्पण आदि कराएं।
 
 
8. 13 दिन तक निम्नलिखित में से कोई भी एक पाठ नित्य करें। 
 
1. गीता पाठ : आप चाहे तो संपूर्ण गीता का पाठ करें या सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों की शांति के लिए और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए गीता के सातवें अध्याय का पाठ करने का विधान भी है।
 
2. पितृ-सूक्तम् : पितृ-सूक्तम् अत्यंत चमत्कारी मंत्र-पाठ है। श्राद्ध पक्ष में पितृ-सूक्त का पाठ संध्या के समय तेल का दीपक जलाकर करने से पितृदोष की शांति होती है, शुभ फल की प्राप्ति होती है और सर्वबाधा दूर होकर उन्नति की प्राप्ति होती है। इसे ही पितृ शांति पाठ भी कहते हैं।
 
 
3. गरुड़ पुराण : श्राद्ध पक्ष में गरुड़ पुराण के पाठ का भी आयोजन किया जाता है।
 
4. गजेंद्र मोक्ष पाठ : कई लोग इस दौरान गजेंद्र मोक्ष कथा और पाठ को भी पढ़ते हैं।
 
5. रुचि कृत पितृ स्तोत्र :रूचि कृत पित्र स्तोत्र का पाठ भी किया जाता है। इसे ही पितृ स्तोत्र का पाठ भी कहते हैं। अथ पितृस्तोत्र।
 
6. पितृ गायत्री पाठ : इस पाठ को पढ़ने से भी पितरों को मुक्ति मिलती है और वे हमें आशीर्वाद देते हैं। इस दौरान पितृ गायत्री मंत्र और ब्रह्म गायत्री मंत्र का भी जप करना चाहिए।
 
 
7. पितृ कवच का पवित्र पाठ : पितृ कवच पढ़ने से पितरों के आशीर्वाद के साथ ही उनकी सुरक्षा भी मिलती है। अपने पितरों को प्रसन्न करके उनका आशी‍ष पाना है तो श्राद्ध पक्ष के दिनों में अवश्य पढ़ें सर्व पितृ दोष निवारण 'पितृ कवच' का यह पावन पाठ।
 
8. पितृ देव चालीसा और आरती : हे पितरेश्वर आपको दे दियो आशीर्वाद। यह पितृ चालीसा पढ़ने से भी पितृ प्रसन्न होते हैं।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

जानिए 3 रहस्यमयी बातें: कब से हो रही है शुरू गुप्त नवरात्रि और इसका महत्व

खरमास समाप्त, मांगलिक कार्य प्रारंभ, जानिए विवाह और वाहन खरीदी के शुभ मुहूर्त

मनचाहा फल पाने के लिए गुप्त नवरात्रि में करें ये 5 अचूक उपाय, हर बाधा होगी दूर

हिंदू नववर्ष पर प्रारंभ हो रहा है रौद्र संवत्सर, 5 बातों को लेकर रहे सावधान

सावधान! सच होने वाली है भविष्यवाणी, शनि के कारण कई देशों का बदलने वाला है भूगोल, भयानक होगा युद्ध?

सभी देखें

धर्म संसार

Gupt Navratri 2026: माघ गुप्त नवरात्रि साधना के 8 वो गुप्त रहस्य, जिन्हें आज भी छिपाकर रखते हैं साधक

Mauni amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर क्या न करें? जानिए 5 जरूरी सावधानियां

Thai Amavasai 2026: क्या है थाई अमावसाई, इस दिन क्या करना शुभ माना जाता है?

Numerology Horoscope 2026: प्रेम, करियर, स्वास्थ्य संबंधी अंक ज्योतिष की भविष्यवाणी, पढ़ें 19 से 25 जनवरी 2026 तक

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (17 जनवरी, 2026)

अगला लेख