रूप चौदस का पर्व कैसे मनाएं, जानिए विशेष मुहूर्त...
दीपावली को एक दिन का पर्व कहना न्यायोचित नहीं होगा। दीपोत्सव का दूसरा दिन नरक चतुर्दशी अथवा रूप चौदस होता है। यह धनतेरस के दूसरे दिन रूप चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है।
दीपावली पर्व के ठीक एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी को छोटी दीवाली, रूप चौदस और काली चतुर्दशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन विधि-विधान से पूजा करने वाले व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।
इसी दिन शाम को दीपदान की प्रथा है जिसे यमराज के लिए किया जाता है। इस पर्व का जो महत्व है उस दृष्टि से भी यह काफी महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पांच पर्वों की श्रृंखला के मध्य में रहने वाला त्योहार है।
दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस फिर नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली। इसे छोटी दीपावली इसलिए कहा जाता है क्योंकि दीपावली से एक दिन पहले रात के वक्त उसी प्रकार दीए की रोशनी से रात के तिमिर को प्रकाश पुंज से दूर भगा दिया जाता है जैसे दीपावली की रात को।
पंडित रामकृष्ण डी. तिवारी के अनुसार रूप चतुर्दशी पर स्वयं सजने, श्रृंगार सामग्री के पूजन और दान संबंधी मुहूर्त इस प्रकार हैं...
रूप चतुर्दशी मुहूर्त दिन 08 नवंबर 2026, रविवार
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 07 नवंबर 2026 को सुबह 10:47 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 08 नवंबर 2026 को सुबह 11:27 बजे
नोट : चूंकि इस दिन प्रात: स्नान करने का महत्व है इसलिए 12 नवंबर को यह त्योहार मनाया जाएगा। लेकिन जो लोग माता कालिका, हनुमानजी और यमदेव की पूजा करने जा रहे हैं वे 11 नवंबर को यह पर्व मनाएंगे। अधिकतर जगहों पर 11 नवंबर को ही यह त्योहार मनाया जाएगा।
नरक चतुर्दशी 08 नवंबर 2026 का स्नान और पूजा मुहूर्त:
चतुर्दशी प्रारंभ: 07 नवंबर 2026 को सुबह 10:47 बजे
चतुर्दशी समाप्त: 08 नवंबर 2026 को सुबह 11:27 बजे
अभ्यंग स्नान मुहूर्त- प्रात: 05:41 से 06:38 तक।
अभिजीत मुहूर्त: दिन में 11:43 से 12:26 तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर में 01:53 से 02:37 तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:31 से 05:57 तक।
प्रदोषकाल मुहूर्त: शाम 05:31 से रात्रि 08:09 तक।
नोट: प्रदोष काल में चतुर्दशी तिथि होने से यम दीपदान, हनुमान पूजा और काली चौदस पूजा 7 नवंबर को होगी। 8 नवंबर की सुबह उदयातिथि में अभ्यंग स्नान होगा।
नरक चतुर्दशी पर क्या करें...
नरक चतुर्दशी पर क्या करें...
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इस दिन सूर्योदय से पूर्व शरीर पर तेल लगाकर स्नान करना चाहिए।
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सूर्योदय के पश्चात स्नान करने वाले के वर्षभर के शुभ कार्य नष्ट हो जाते हैं।
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स्नान के पश्चात दक्षिण मुख करके यमराज से प्रार्थना करने पर व्यक्ति के वर्ष भर के पाप नष्ट हो जाते हैं।
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इस दिन सायंकाल देवताओं का पूजन करके घर, बाहर, सड़क आदि प्रत्येक स्थान पर दीपक जलाकर रखना चाहिए।
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पांच दिवसीय इस पर्व का प्रमुख पर्व लक्ष्मी पूजन अथवा दीपावली होता है। इस दिन रात्रि को जागरण करके धन की देवी लक्ष्मी माता का पूजन विधिपूर्वक करना चाहिए एवं घर के प्रत्येक स्थान को स्वच्छ करके वहां दीपक लगाना चाहिए, जिससे घर में लक्ष्मी का वास एवं दरिद्रता का नाश होता है।
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इस दिन देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश तथा द्रव्य, आभूषण आदि का पूजन करके 13 अथवा 26 दीपकों के मध्य एक तेल का दीपक रखकर उसकी चारों बातियों को प्रज्वलित करना चाहिए एवं दीपमालिका का पूजन करके उन दीपों को घर में प्रत्येक स्थान पर रखें एवं चार बातियों वाला दीपक रातभर जलता रहे ऐसा प्रयास करें।