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प्रदोष है आज, जानिए प्रामाणिक कथा, नियम, विधि, व्रत का फल और 7 वार के प्रदोष का महत्व

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11 जुलाई 2022 को सोम प्रदोष,विजया पार्वती व्रत और मंगला तेरस है.... आइए जानें प्रदोष पर खास जानकारी 

प्रत्येक माह में जिस तरह दो एकादशी होती है उसी तरह दो प्रदोष भी होते हैं। त्रयोदशी (तेरस) को प्रदोष कहते हैं। हिन्दू धर्म में एकादशी को विष्णु से तो प्रदोष को शिव से जोड़ा गया है। दरअसल, इन दोनों ही व्रतों से चंद्र का दोष दूर होता है।
 
प्रदोष कथा
प्रदोष को प्रदोष कहने के पीछे एक कथा जुड़ी हुई है। संक्षेप में यह कि चंद्र को क्षय रोग था, जिसके चलते उन्हें मृत्युतुल्य कष्टों हो रहा था। भगवान शिव ने उस दोष का निवारण कर उन्हें त्रयोदशी के दिन पुन:जीवन प्रदान किया था अत: इसीलिए इस दिन को प्रदोष कहा जाने लगा।
 
प्रदोष व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं
प्रदोष काल में उपवास में सिर्फ हरे मूंग का सेवन करना चाहिए, क्योंकि हरा मूंग पृथ्‍वी तत्व है और मंदाग्नि को शांत रखता है। प्रदोष व्रत में लाल मिर्च, अन्न, चावल और सादा नमक नहीं खाना चाहिए। हालांकि आप पूर्ण उपवास या फलाहार भी कर सकते हैं।
 
प्रदोष व्रत की विधि-
व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले उठें। नित्यकर्म से निपटने के बाद सफेद रंग के कपड़े पहने। पूजाघर को साफ और शुद्ध करें। गाय के गोबर से लीप कर मंडप तैयार करें। इस मंडप के नीचे 5 अलग अलग रंगों का प्रयोग कर के रंगोली बनाएं। फिर उतर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे और शिव जी की पूजा करें। पूरे दिन किसी भी प्रकार का अन्य ग्रहण ना करें।
 
प्रदोष व्रत फल
माह में दो प्रदोष होते हैं। अलग-अलग दिन पड़ने वाले प्रदोष की महिमा अलग-अलग होती है। जैसे सोमवार का प्रदोष, मंगलवार को आने वाला प्रदोष और अन्य वार को आने वाला प्रदोष सभी का महत्व और लाभ अलग अलग है।
 
रविवार-
जो प्रदोष रविवार के दिन पड़ता है उसे भानुप्रदोष या रवि प्रदोष कहते हैं। रवि प्रदोष का संबंध सीधा सूर्य से होता है। सूर्य से संबंधित होने के कारण नाम, यश और सम्मान के साथ ही सुख, शांति और लंबी आयु दिलाता है। इससे कुंडली में अपयश योग और सूर्य संबंधी सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
 
सोमवार-
जो प्रदोष सोमवार के दिन पड़ता है उसे सोम प्रदोष कहते हैं। जिसका चंद्र खराब असर दे रहा है उनको तो यह प्रदोष जरूर नियमपूर्वक रखना चाहिए जिससे जीवन में शांति बनी रहेगी। यह व्रत रखने से इच्छा अनुसार फल प्राप्ति होती है। अक्सर लोग संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत रखते हैं।
 
मंगलवार-
मंगलवार को आने वाले इस प्रदोष को भौम प्रदोष कहते हैं। जिसका मंगल खराब है उसे इस दिन व्रत अवश्य रखना चाहिए। इस दिन स्वास्थ्य सबंधी तरह की समस्याओं से मुक्ति पाई जा सकती है। इस दिन प्रदोष व्रत विधिपूर्वक रखने से कर्ज से छुटकारा मिल जाता है।
 
बुधवार-
बुधवार को आने वाले प्रदोष को सौम्यवारा प्रदोष भी कहा जाता है। यह शिक्षा एवं ज्ञान प्राप्ति के लिए किया जाता है। साथ ही यह जिस भी तरह की मनोकामना लेकर किया जाए उसे भी पूर्ण करता है।
 
गुरुवार-
गुरुवार को आने वाले प्रदोष को गुरुवारा प्रदोष कहते हैं। इससे बृहस्पति ग्रह शुभ प्रभाव तो देता ही है साथ ही इसे करने से पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। अक्सर यह प्रदोष शत्रु एवं खतरों के विनाश और हर तरह की सफलता के लिए किया जाता है।
 
शुक्रवार-
शुक्रवार को आने वाले प्रदोष को भ्रुगुवारा प्रदोष कहा जाता है। अर्थात जिस शुक्रवार को त्रयोदशी तिथि हो वह भ्रुगुवारा प्रदोष कहलाती है। जीवन में सौभाग्य की वृद्धि हेतु यह प्रदोष किया जाता है। सौभाग्य है तो धन और संपदा स्वत: ही मिल जाती है।
 
शनिवार-
शनिवार को यदि तेरस है तो इसे शनि प्रदोष कहते हैं। इस प्रदोष से पुत्र की प्राप्ति होती है। अक्सर लोग इसे हर तरह की मनोकामना के लिए और नौकरी में पदोन्नति की प्राप्ति के लिए करते हैं।
 
अंत में कुछ विशेष
रवि प्रदोष, सोम प्रदोष व शनि प्रदोष के व्रत को पूर्ण करने से अतिशीघ्र कार्यसिद्धि होकर अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है। सर्वकार्य सिद्धि हेतु यदि कोई भी व्यक्ति 11 अथवा एक वर्ष के समस्त त्रयोदशी के व्रत करता है तो उसकी समस्त मनोकामनाएं शीघ्रता से पूर्ण होती है।
11 जुलाई सोमवार को है सोम प्रदोष का शुभ व्रत, राशि अनुसार 1 छोटा सा मंत्र खोल देगा किस्मत के दरवाजे

 सोम प्रदोष 2022 : मुहूर्त से लेकर महत्व तक और व्रत विधि से लेकर मंत्र तक जानिए 1 क्लिक पर हर बात


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