Publish Date: Wed, 01 Jul 2026 (10:08 IST)
Updated Date: Wed, 01 Jul 2026 (10:12 IST)
Ashadha Month 2026: इस बार 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास यानी चार महीनों की विशेष आध्यात्मिक अवधि का प्रारंभ हो रहा है। हिंदू धर्म में चातुर्मास का समय आत्म-निरीक्षण, तप, भक्ति और शारीरिक-मानसिक शुद्धि के लिए सर्वोत्तम माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों में भगवान श्री हरि विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथों में आ जाता है।
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चूंकि इस बार आषाढ़ मास के उत्तरार्ध में चातुर्मास शुरू हो रहा है, इसलिए इसके कड़े नियमों को पहले से जान लेना बेहद जरूरी है ताकि आप अनजाने में किसी दोष के भागी न बनें।
आइए जानते हैं चातुर्मास की शुरुआत से पहले ध्यान रखने योग्य जरूरी नियम और वर्जित बातें:
1. मांगलिक और शुभ कार्यों पर पूर्ण विराम
चातुर्मास के दौरान संसार के पालनहार भगवान विष्णु शयन अवस्था में होते हैं, इसलिए इस अवधि में दैवीय आशीर्वाद की कमी मानी जाती है।
क्या न करें: इन चार महीनों में विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत/ जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश, नए व्यापार की शुरुआत और भूमि पूजन जैसे सभी प्रकार के शुभ एवं मांगलिक कार्य पूरी तरह वर्जित रहते हैं।
2. ऋतु के अनुसार खान-पान और सेहत से जुड़े कड़े नियम
चातुर्मास पूरी तरह से वर्षा और शरद ऋतु में पड़ता है, जब हमारा पाचन तंत्र (Digestion) बेहद कमजोर हो जाता है और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। शास्त्रों में महीने दर महीने कुछ खास चीजों को छोड़ने का नियम है:
* पहले महीने (श्रावण): हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी, साग आदि) खाना मना होता है।
* दूसरे महीने (भाद्रपद): दही और उससे बनी चीजों का सेवन वर्जित रहता है।
* तीसरे महीने (आश्विन): दूध का सेवन करने से बचना चाहिए।
* चौथे महीने (कार्तिक): दालें (विशेषकर उड़द और चना) व द्विदल (दो टुकड़ों वाली दालें) का त्याग किया जाता है।
3. भूमि शयन और ब्रह्मचर्य का पालन
चातुर्मास विलासिता को छोड़कर सादगी से जीने का संदेश देता है।
नियम: इन दिनों में पलंग या गद्दे के बजाय जमीन पर चटाई बिछाकर सोने यानी भूमि शयन को अत्यंत फलदायी माना गया है। इसके साथ ही शारीरिक और मानसिक स्तर पर पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है।
4. वाणी पर नियंत्रण और सात्विक आचरण
संतों और विचारकों के अनुसार, चातुर्मास में केवल पेट का उपवास जरूरी नहीं है, बल्कि अपनी इंद्रियों का उपवास भी जरूरी है।
नियम: इन चार महीनों में किसी की निंदा न करें, झूठ न बोलें, गुस्सा करने से बचें और किसी का अपमान न करें। ऐसा करने से संचित पुण्यों का नाश होता है। दिन में केवल एक बार ही शुद्ध सात्विक भोजन करने का नियम सबसे उत्तम माना गया है।
5. बाल और नाखून काटने पर रोक
नियम: चातुर्मास के दौरान, विशेषकर श्रावण के महीने में शरीर की विलासिता और सौंदर्य प्रसाधनों की तरफ ध्यान कम दिया जाता है। इसलिए इस अवधि में बाल कटवाना, दाढ़ी बनाना और नाखून काटना वर्जित माना जाता है। तपस्वी और साधक इन चार महीनों में क्षौर कर्म/ बाल कटवाना जैसे कार्य नहीं करते हैं।
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राजश्री कासलीवाल
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