Hanuman Chalisa

प्रयाग कुंभ मेले में अक्षय वट के दर्शन जरूर करें

अनिरुद्ध जोशी
अक्षय वट संगम के निकट सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। यह बरगद का बहुत पुराना पेड़ है जो प्रलयकाल में भी नष्ट नहीं होता। पर्याप्त सुरक्षा के बीच संगम के निकट किले में अक्षय वट की एक डाल के दर्शन कराए जाते हैं। पूरा पेड़ कभी नहीं दिखाया जाता। इस तरह के तीन और वृक्ष हैं- मथुरा-वृंदावन में वंशीवट, गया में गयावट जिसे बौधवट भी कहा जाता है और उज्जैन में पवित्र सिद्धवट।
 
 
सप्ताह में दो दिन, अक्षय वट के दर्शन के लिए द्वार खोले जाते हैं। हालांकि यह बहुत पुराना सूखा वृक्ष है जो कितने हजार वर्ष पुराना है यह कहा नहीं जा सकता। मगर ऐसा माना जाता है कि प्रलय काल में भगवान विष्णु इसके एक पत्ते पर बाल मुकंद रूप में अपना अंगूठा चूसते हुए कमलवत शयन करते हैं।
 
 
अक्षय वट की कथा : पृथ्वी को बचाने के लिए भगवान ब्रह्मा ने यहां पर एक बहुत बड़ा यज्ञ किया था। इस यज्ञ में वह स्वयं पुरोहित, भगवान विष्णु यजमान एवं भगवान शिव उस यज्ञ के देवता बने थे।
 
 
तब अंत में तीनों देवताओं ने अपनी शक्ति पुंज के द्वारा पृथ्वी के पाप बोझ को हल्का करने के लिए एक 'वृक्ष' उत्पन्न किया। यह एक बरगद का वृक्ष था जिसे आज अक्षयवट के नाम से जाना जाता है। यह आज भी विद्यमान है। 
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

देवशयनी एकादशी 2026: कई शुभ योगों का दुर्लभ संयोग, ये 5 उपाय जरूर करें

सूर्य का शनि के पुष्य नक्षत्र में गोचर, जानें मेष से मीन तक सभी 12 राशियों पर इसका प्रभाव

सूर्य का कर्क राशि में गोचर, जानें मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का राशिफल

Chaturmas 2026: वर्ष 2026 में चातुर्मास कब से कब तक रहेगा?

हरतालिका तीज 2026 कब है? जानें व्रत की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

सभी देखें

धर्म संसार

Kark Sankranti 2026: सूर्य कर्क संक्रांति पर करें ये 7 शुभ कार्य, मिलेगी सूर्य देव की कृपा

पुरी जगन्नाथ रथयात्रा 2026: तारीख, संपूर्ण शेड्यूल और यात्रा गाइड

जब मित्र के घर पधारेंगे ब्रह्मांड के राजा: सूर्य का कर्क राशि में गोचर चमकाएगा इन 4 राशियों का भाग्य

Chaturmas Fasting Rules: चातुर्मास में क्या खाएं और क्या नहीं, अपना लिए ये नियम तो होंगे 5 फायदे

जब सूर्य चलेंगे शनि के पुष्य नक्षत्र की राह: 5 राशियों की चमकेगी किस्मत

अगला लेख