Publish Date: Friday, 30 January 2026 (17:42 IST)
Updated Date: Friday, 30 January 2026 (01:44 IST)
मथुरा। ब्रजवासियों के इस वर्ष के अंतिम छप्पन भोग को अनूठे सामूहिक आराधना के पर्व के रूप में मनाने की तैयारियां जोरों पर हैं।
एक ओर जहां कार्यक्रम स्थल को पुष्पों से सजाने की तैयारियां चल रही हैं वहीं दूसरी ओर इस आयोजन में अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है इसीलिए इस कार्यक्रम के आयोजक गोवर्धननाथ सेवा समिति, मथुरा ने दिव्य गोविन्दाभिषेक का आयोजन एवं गिरिराज परिक्रमा का आयोजन शुक्रवार के दिन किया है ताकि काफी तीर्थयात्री गोवर्धन पहुंचें।
कार्यक्रम के मुख्य आयोजक अशोक बेरीवाल ने बताया कि इस छप्पन भोग के आयोजन के पीछे द्वापर की वह घटना है जिसमें भगवान श्यामसुन्दर ने इन्द्र के कोप से ब्रजवासियों की रक्षा करने के लिए अपनी सबसे छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को धारण किया था।
मान्यताओं के अनुसार कृष्ण ने स्वयं द्वापर में जब गिरिराज का पूजन करने के लिए ब्रजवासियों से कहा था तो ब्रजवासी नाना प्रकार के व्यंजन बनाकर लाए थे और उस समय व्यंजनों की संख्या 56 हो गई थी तथा पूजन करने वाले ब्रजवासियों की संख्या भी बहुत अधिक हो गई थी। उस समय स्वयं गोविन्द ने गिरिराज का अभिषेक और पूजन भी किया गया था।
ब्रजवासियों में एकता की भावना पैदा करने के लिए गोविन्द ने ब्रज को डुबोने के इन्द्र के प्रयास को विफल करने तथा ब्रजवासियों को सामूहिक एकता का संदेश देने के लिए न केवल गोवर्धन को अपनी छोटी उंगली पर धारण किया था बल्कि ब्रजवासियों को अपनी अपनी लाठी गोवर्धन के नीचे लगाने का सुझाव भी दिया था।
बेरीवाल का कहना है कि 20 और 21 नवंबर के आयोजन के पीछे भावनात्मक एकता पैदा करना भी एक उद्देश्य है तथा इस आयोजन का प्रमुख भाग गिरिराजजी का पंचामृत अभिषेक भी है। इसमें जहां कई मन दूध, दही, घी, शहद का प्रयोग किया जाएगा वहीं देश की पवित्र नदियों के जल एवं औषधियों से भी अभिषेक किया जाएगा।
21 नवंबर को ठाकुरजी का हीरा, पन्ना, माणिक, मोती, पुखराज, नीलम जैसे रत्नों से श्रृंगार किया जाएगा। 56 भोग के दर्शन 21 नवंबर को दोपहर 2 बजे आरती के साथ खुलेंगे तथा उसके बाद रात 12 बजे दर्शन बंद होने के समय तक गिर्राज की जय-जयकार ब्रज के लोकगीतों से होती है।
कुल मिलाकर इस कार्यक्रम के जरिए गिर्राज की तलहटी में साक्षात द्वापर का अवतरण हो जाता है। (वार्ता)