Hanuman Chalisa

जब स्वप्न में देखा त्रिजटा ने ये भयंकर दृश्य तो कांप उठी

अनिरुद्ध जोशी
रावण के भाई विभीषण की पत्नी का गन्धर्व कन्या सरमा थीं। सरमा की पुत्री का नाम त्रिजटा था। जब राम ने माता सीता का हरण कर लिया था तो उन्हें अशोक वाटिका में रखा गया था। इस वाटिका में त्रिजटा को उनकी देखरेख के लिए नियुक्त किया गया था। रामायण में त्रिजटा का जिक्र बहुत बार हुआ है।
 
 
दोनों मां और बेटी ने माता सीता की बहुत मदद की थी। रामभक्त त्रिजटा हर मोड़ पे सीता का हौसला बनाए रखती थीं। एक बार त्रिजटा ने अपने स्वप्न में बहुत ही भयानक दृश्य देखा। उसने देखा की पूरी लंका धू-धू कर जल रही है। चारों ओर हाहाकार मचा हुआ है। उसने यह भी देखा की इस लंका को एक वानर उड़ उड़ कर जला रहा है। यह दृश्य देखकर वह सहम गई। बाद में उसने सभी राक्षसनियों को अपना स्वप्न सुनाया।
 
 
बाद में जब हनुमानजी सीता माता को ढूंढते-ढूंढते अशोक वाटिका पहुंचे तो उन्होंने माता सीता को राम की अंगूठी दी। फिर जब हनुमानजी लंका का दहन कर रहे थे तब उन्होंने अशोक वाटिका को इसलिए नहीं जलाया, क्योंकि वहां सीताजी को रखा गया था। दूसरी ओर उन्होंने विभीषण का भवन इसलिए नहीं जलाया, क्योंकि विभीषण के भवन के द्वार पर तुलसी का पौधा लगा था। भगवान विष्णु का पावन चिह्न शंख, चक्र और गदा भी बना हुआ था। सबसे सुखद तो यह कि उनके घर के ऊपर 'राम' नाम अंकित था। यह देखकर हनुमानजी ने उनके भवन को नहीं जलाया।
 
 
त्रिजटा ने जब यह दृश्य देखा तो उसे अपनी आंखों पर विश्‍वास नहीं हुआ।
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

आदि शंकराचार्य का काल निर्धारण: 508 ईसा पूर्व या 788 ईस्वी में हुए थे शंकराचार्य?

अचानक बदलने वाली है इन 5 राशियों की तकदीर, ग्रहों का बड़ा संकेत

नास्त्रेदमस को टक्कर देते भारत के 7 भविष्यवक्ता, जानें चौंकाने वाली भविष्यवाणियां

मांगलिक दोष और वैवाहिक जीवन: क्या वाकई यह डरावना है या सिर्फ एक भ्रांति?

करियर का चुनाव और कुंडली का दसवां भाव: ग्रहों के अनुसार चुनें सही कार्यक्षेत्र

सभी देखें

धर्म संसार

28 April Birthday: आपको 28 अप्रैल, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

सुवर्णमत्स्या: रावण की पुत्री का हनुमानजी पर मोहित हो जाना

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 28 अप्रैल 2026: मंगलवार का पंचांग और शुभ समय

Parshuram Dwadashi: परशुराम द्वादशी क्यों मनाते हैं, जानिए इसका महत्व

पुरुषोत्तम मास का पौराणिक महत्व और कथा

अगला लेख