Dhanteras
✕

रमजान माह : आ गया इबादत का महीना...

Webdunia
* माहे-रमजान देता है आत्मा को पाकीजगी का मौका
 
 
पाक महीने रमजान की रूहानी चमक से दुनिया एक बार फिर रोशन हो चुकी है और फिजा में घुलती अजान और दुआओं में उठते लाखों हाथ खुदा से मुहब्बत के जज्बे को शिद्दत दे रहे हैं। बंदे को हर बुराई से दूर रखकर अल्लाह के नजदीक लाने का मौका देने वाला रमजान का पवित्र महीना रविवार से शुरू हो गया है। 
 
दौड़-भाग और खुदगर्जीभरी जिंदगी के बीच इंसान को अपने अंदर झांकने और खुद को अल्लाह की राह पर ले जाने की प्रेरणा देने वाले रमजान माह में भूख-प्यास समेत तमाम शारीरिक इच्छाओं तथा झूठ बोलने, चुगली करने, खुदगर्जी, बुरी नजर डालने जैसी सभी बुराइयों पर लगाम लगाने की मुश्किल कवायद रोजेदार को अल्लाह के बेहद करीब पहुंचा देती है।
 
इस माह में रोजेदार अल्लाह के नजदीक आने की कोशिश के लिए भूख-प्यास समेत तमाम इच्छाओं को रोकता है, बदले में अल्लाह अपने उस इबादतगुजार रोजेदार बंदे के बेहद करीब आकर उसे अपनी रहमतों और बरकतों से नवाजता है। इस बार पवित्र माह रमजान की शुरुआत नौतपा में होने से रोजेदारों की श्रद्धा की कड़ी परीक्षा भी होगी। रोजे के दौरान खाने-पीने से लेकर पानी तक का परहेज रखा जाता है, यहां तक कि थूक भी नहीं गटक सकते। इस्लामी कैलेंडर का नवां माह रमजान होता है, जिसे अरबी भाषा में रमादान भी कहते हैं। 
 
इस्लाम की 5 बुनियादों में रोजा शामिल है और इस पर अमल के लिए ही अल्लाह ने रमजान का महीना मुकर्रर किया है। खुद अल्लाह ने कुरान शरीफ में इस महीने का जिक्र किया है। इंसान के अंदर जिस्म और रूह हैं। आम दिनों में उसका पूरा ध्यान खाना-पीना और दीगर जिस्मानी जरूरतों पर रहता है लेकिन असल चीज उसकी रूह है। इसी की तरबीयत और पाकीजगी के लिए अल्लाह ने रमजान बनाया है और यही रमजान माह की विशेषता भी है। 
 
रमजान माह के दौरान हर नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। इस महीने में एक रकात नमाज अदा करने का सवाब 70 गुना हो जाता है। साथ ही इस माह में दोजख (नरक) के दरवाजे भी बंद कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इसी महीने में कुरान शरीफ दुनिया में नाजिल (अवतरित) हुआ था। 
 
अमूमन 30 दिनों के रमजान माह को 3 अशरों (खंडों) में बांटा गया है। पहला अशरा ‘रहमत’ का है। इसमें अल्लाह अपने बंदों पर रहमत की दौलत लुटाता है। दूसरा अशरा ‘बरकत’ का है जिसमें खुदा बरकत नाजिल करता है जबकि तीसरा अशरा ‘मगफिरत’ का है। इस अशरे में अल्लाह अपने बंदों को गुनाहों से पाक कर देता है।

ALSO READ: अज़ान क्या है? क्या है अज़ान का इतिहास
 
आज का इंसान बेहद खुदगर्ज हो चुका है लेकिन रोजों में वह ताकत है, जो व्यक्ति को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराती है। रमजान माह रोजे बंदे को आत्मावलोकन का मौका देते हैं। अगर इंसान सिर्फ अपनी कमियों को देखकर उन्हें दूर करने की कोशिश करे तो दुनिया से बुराई खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगी। रमजान का छुपा संदेश भी यही है। 

 

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 09 नवंबर 2026: सोमवार का पंचांग और शुभ समय

08 November Birthday: आपको 8 नवंबर, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj Ka Rashifal: आज 08 नवंबर, 2026 का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का भविष्यफल

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 08 नवंबर 2026: रविवार का पंचांग और शुभ समय

श्री महालक्ष्मी चालीसा | Shri Mahalakshmi Chalisa

सभी देखें

धर्म संसार

Tulsi Vivah 2026: देवउठनी एकादशी पर ऐसे करें तुलसी-शालिग्राम विवाह की तैयारी, चमकेगा सौभाग्य

Chhath Puja 2026 Checklist: नहाय-खाय से पारण तक: ऐसे करें छठ पूजा की संपूर्ण तैयारी, कोई भूल न हो

गोवर्धन पूजा के दिन सुहाग पड़वा क्यों मनाते हैं, क्या है इसका महत्व, भेजिए ये 20 सुंदर शुभकामनाएं

Diwali 2026: दिवाली की रात चुपचाप कर लें ये 5 गुप्त प्रयोग, साल भर होगी अपार धन की वर्षा

भाई दूज पर क्यों लगाया जाता है तिलक? बहनें क्यों खिलाती हैं भाई को पान? जानें इसका पौराणिक महत्‍व

अगला लेख