| चंदा रे, मेरे भैया से कहना बहना याद करे... यह गाना सुनकर मुझे उन बहनों की याद आ गई जिन्हें मैंने पहले कभी देखा नहीं। दूर रहती हैं। कभी उनके पास जाने का अवसर नहीं आया। जब मैं नहीं गया तो उन बेचारियों से क्या उम्मीद करूँ कि वे दोनों भी आ जाएँ। इन बहनों का मेरे साथ केवल पत्र का रिश्ता है। हाँ, हमने कभी एक-दूसरे को देखा नहीं केवल पत्र द्वारा ही एक-दूसरे की भावनाएँ व्यक्त करते हैं। ‘नईदुनिया’ के जरिए बना रिश्ता : हमारा रिश्ता बने करीब 8 साल हो गए। हुआ यूँ कि मेरे पत्र नईदुनिया जैसे प्रतिष्ठित अखबार में छपते रहते थे। इन्हीं में से एक पत्र मेरी इन बहनों को इतना अच्छा लगा कि मेरी प्रशंसा भरा पत्र इन्होंने बजाए अखबार के कार्यालय में भेजने के मेरे पास भेज दिया। उस पत्र में इन दोनों का नाम नहीं था, न ही मेरे बारे में कुछ संबोधन किया गया। बस मेरी प्रशंसा में बहुत कुछ लिखा गया था।
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