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आज के शुभ मुहूर्त

(त्रयोदशी तिथि)
  • तिथि- आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:32 से 12:20 तक
  • त्योहार/व्रत/मुहूर्त-मासिक शिवरात्रि, शिव चतुर्दशी
  • राहुकाल: शाम 05:31 से 07:15 तक
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नासिक का कालाराम मंदिर

दक्षिण काशी के नासिक में किसी समय प्रभु रामचंद्र का प्रवास रहा था। प्रभु श्रीराम ने जहां-जहां पग धरे वह भूमि पवित्र हो गई। उनके पदचिह्नों के रूप में अनेक मंदिर आज भी नासिक में नजर आते हैं।
दक्षिण काशी के नासिक में किसी समय प्रभु रामचंद्र का प्रवास रहा था। प्रभु श्रीराम ने जहां-जहां पग धरे वह भूमि पवित्र हो गई। उनके पदचिह्नों के रूप में अनेक मंदिर आज भी नासिक में नजर आते हैं।
यूं तो नासिक में प्रभु श्रीराम के कई मंदिर हैं। कालाराम, गोराराम, मुठे का राम, यहां तक कि महिलाओं के लिए विशेषराम आदि, परंतु इन सभी में 'कालाराम' की अपनी ही विशेषता है।
यूं तो नासिक में प्रभु श्रीराम के कई मंदिर हैं। कालाराम, गोराराम, मुठे का राम, यहां तक कि महिलाओं के लिए विशेषराम आदि, परंतु इन सभी में 'कालाराम' की अपनी ही विशेषता है।
मंदिर में विराजित प्रभु श्रीराम की मूर्ति भी काले पाषाण से बनी हुई है, इसलिए इसे 'कालाराम' कहा जाता है। प्रभु श्रीराम के साथ ही यहां सीता व लक्ष्मण की भी आकर्षक प्रतिमाएं विराजमान हैं।
मंदिर में विराजित प्रभु श्रीराम की मूर्ति भी काले पाषाण से बनी हुई है, इसलिए इसे 'कालाराम' कहा जाता है। प्रभु श्रीराम के साथ ही यहां सीता व लक्ष्मण की भी आकर्षक प्रतिमाएं विराजमान हैं।
ये मंदिर ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्व रखता ही है, साथ ही इसकी बनावट में इस तरह का आकर्षण है कि जो मंत्रमुग्ध कर देता है।
ये मंदिर ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्व रखता ही है, साथ ही इसकी बनावट में इस तरह का आकर्षण है कि जो मंत्रमुग्ध कर देता है।
पूरा मंदिर 74 मीटर लंबा और 32 मीटर चौड़ा है। मंदिर की चारों दिशाओं में चार दरवाजे हैं।
पूरा मंदिर 74 मीटर लंबा और 32 मीटर चौड़ा है। मंदिर की चारों दिशाओं में चार दरवाजे हैं।
इस मंदिर के कलश तक की ऊंचाई 69 फीट है तथा कलश 32 टन शुद्ध सोने से निर्मित किया हुआ है।
इस मंदिर के कलश तक की ऊंचाई 69 फीट है तथा कलश 32 टन शुद्ध सोने से निर्मित किया हुआ है।
यहां विराजमान श्री हनुमानजी प्रभु श्रीराम के चरणों की ओर देखते हुए प्रतीत होते हैं।
यहां विराजमान श्री हनुमानजी प्रभु श्रीराम के चरणों की ओर देखते हुए प्रतीत होते हैं।
मंदिर परिसर में सीता गुफा है। कहा जाता है कि माता सीता ने यहां बैठकर साधना की थी। मंदिर के नजदीक से गोदावरी नदी बहती है, जहां प्रसिद्ध रामकुंड है। मंदिर की भव्य छटा देखते ही बनती है।
मंदिर परिसर में सीता गुफा है। कहा जाता है कि माता सीता ने यहां बैठकर साधना की थी। मंदिर के नजदीक से गोदावरी नदी बहती है, जहां प्रसिद्ध रामकुंड है। मंदिर की भव्य छटा देखते ही बनती है।