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भगवान जगन्नाथ मंदिर परंपरा: विष्णु दमनोत्सव क्या होता है और क्या है इसका महत्व?

WD Feature Desk
सोमवार, 30 मार्च 2026 (12:28 IST)
विष्णु दमनोत्सव (जिसे 'दमनक पर्व' या 'दौमनक' भी कहा जाता है) हिंदू धर्म, विशेषकर वैष्णव परंपरा और जगन्नाथ संस्कृति का एक महत्वपूर्ण उत्सव है। यह मुख्य रूप से चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी (दमनक चतुर्दशी) को मनाया जाता है। इसके प्रमुख पहलू निम्नलिखित हैं।
 

1. उत्सव का मुख्य आधार

इस उत्सव में दमनक (मरुआ या दौना) नामक सुगंधित पौधे की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दमनक नाम का एक राक्षस था जिसे भगवान विष्णु ने मारा था। उसी की स्मृति में या उस राक्षस के रूपांतरित रूप (पौधे) को भगवान को अर्पित करने के रूप में यह पर्व मनाया जाता है।
 

2. पूरी (ओडिशा) की परंपरा

पुरी के जगन्नाथ मंदिर में यह उत्सव बहुत भव्य होता है।
दमनक चोरी: एक विशेष अनुष्ठान होता है जिसमें भगवान जगन्नाथ के प्रतिनिधि स्वरूप (मदनमोहन) को मंदिर से बाहर 'नरेन्द्र सरोवर' के पास एक बगीचे में ले जाया जाता है। वहाँ प्रतीकात्मक रूप से दमनक के पौधों की "चोरी" की जाती है और फिर उन्हें भगवान को अर्पित किया जाता है। 
श्रृंगार: भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी को इन सुगंधित दमनक फूलों और पत्तों से सजाया जाता है।
 

3. धार्मिक महत्व

ऋतु परिवर्तन: यह उत्सव वसंत ऋतु के स्वागत और प्रकृति के साथ जुड़ाव का प्रतीक है।
समर्पण: भक्त भगवान को सुगंधित वस्तुएं अर्पित कर अपनी भक्ति व्यक्त करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन भगवान विष्णु को दमनक अर्पित करता है, उसे अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।
संक्षेप में: यह भगवान विष्णु की विजय और प्रकृति की सुगंध (दमनक पौधा) के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्व है।

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