suvichar

मकर संक्रांति की तरह तुला संक्रांति क्या है?

अनिरुद्ध जोशी
प्रतीकात्मक चित्र
सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में जाने को ही संक्रांति कहते हैं। एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति की अवधि ही सौर मास है। वैसे तो सूर्य की संक्रांति 12 हैं, लेकिन इनमें से 4 संक्रांति ही महत्वपूर्ण हैं जिनमें मेष, तुला, कर्क और मकर संक्रांति प्रमुख हैं।
 
 
सौर मास के दो हिस्से है उत्तरायण और दक्षिणायम। सूर्य के मकर राशी में जाने से उत्तरायण प्रारंभ होता है और कर्क में जाने पर दक्षिणायन प्रारंभ होता है। इस बीच तुला संक्रांति होती है।
 
 
तुला संक्रांति : सूर्य का तुला राशि में प्रवेश तुला संक्रांति कहलाता है। यह प्रवेश अक्टूबर माह के मध्य में होता है। तुला संक्रांति का कर्नाटक में खास महत्व है। इसे ‘तुला संक्रमण’ कहा जाता है। इस दिन ‘तीर्थोद्भव’ या 'तीर्थधव' के नाम से कावेरी के तट पर मेला लगता है, जहां स्नान और दान-पुण्‍य किया जाता है। इस तुला माह में गणेश चतुर्थी की भी शुरुआत होती है। कार्तिक स्नान प्रारंभ हो जाता है।
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

धर्म संसार

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 17 सितंबर 2026: गुरुवार का पंचांग और शुभ समय

शनि और शुक्र का षडाष्टक योग, 5 राशियों के लिए अटके कार्य होंगे पूर्ण, मिलेगा भाग्य का साथ

Mahalakshmi Vrat 2026: कब से कब तक रहेगा महालक्ष्मी व्रत? जानें तिथि, महत्व और पूजा के खास नियम

Vishwakarma Jayanti : क्‍यों की जाती है भगवान विश्‍वकर्मा की पूजा, मशीन और औजारों का जयंती से क्‍या है संबंध?

Kanya Sankranti 2026: कन्या संक्रांति कब है? जानें महत्व, पूजा विधि और इस दिन दान करने से मिलने वाले पुण्य

अगला लेख