Hanuman Chalisa

हरियाली तीज : पढ़ें 10 रोचक बातें

Webdunia
इस दिन सुहागिन मेंहदी लगाकर झूलों पर सावन का आनंद मनाती हैं, प्रकृति धरती पर चारों ओर हरियाली की चादर बिछा देती है, और मन मयूर हो उठता है।
 
हाथों पर हरी मेंहदी लगाना प्रकृति से जुड़ने की अनुभूति है जो सुख-समद्धि का प्रतीक है। इसके बाद वही मेंहदी लाल हो उठती है जो सुहाग, हर्षोल्लास एवं सौंदर्य का प्रतिनिधित्व करती है।

ALSO READ: झूले, मेंहदी, लहरिया और चूडियों का पर्व हरियाली तीज
 
जिस लड़की के ब्याह के बाद पहला सावन आता है, उसे ससुराल में नहीं रखा जाता। इसका कारण यह भी था कि नवविवाहिता अपने मां बाप से ससुराल में आ रही कठिनाइयों, खटटे् मीठे अनुभवों को सखी सहेलियों के साथ बांट सके,और मन हल्का करने के अलावा कठिनाईयों का समाधान भी खोजा जा सके। 
 
नवविवाहित पुत्री की ससुराल से सिंगारा आता है, और ऐसी ही सामग्री का आदान प्रदान किया जाता है ताकि संबंध और मधुर हों और रिश्तेदारी प्रगाढ़ हो।
 
इसमें उसके लिए साड़ियां, सौंदर्य प्रसाधन, सुहाग की चूड़ियां व संबंधित सामान के अलावा उसके भाई बहनों के लिए आयु के अनुसार कपड़े, मिष्ठान तथा उसकी आवश्यकतानुसार गिफ्ट भेजे जाते हैं।
 
ALSO READ: हरियाली तीज की पौराणिक और प्रामाणिक व्रत कथा
तीज से एक दिन पहले मेंहदी लगा ली जाती है। तीज के दिन सुबह स्नानादि श्रृंगार करके, नए वस्त्र व आभूषण धारण करके गौरी की पूजा होती है। इसके लिए मिट्टी या अन्य धातु से बनी शिवजी-पार्वती व गणेश जी की, मूर्ति रख कर उन्हें वस्त्रादि पहना कर रोली, सिंदूर, अक्षत आदि से पूजन किया जाता है।
 
इसके बाद 8 पूरी, 6 पूओं से भोग लगाया जाता है। फिर यह बायना जिसमें चूड़ियां, श्रृंगार का सामान व साड़ी, मिठाई, दक्षिणा या शगुन राशि इत्यादि अपनी सास, जेठानी, या ननद को देते हुए चरण स्पर्श करती हैं। 
 
इसके बाद पारिवारिक भोजन किया जाता है। सामूहिक रुप से झूला झूलना, तीज मिलन, गीत संगीत, जलपान आदि किया जाता है।

ALSO READ: हरियाली तीज का महत्व एवं पूजन विधि जानिए..
 
कुल मिला कर यह पारिवारिक मिलन का सुअवसर होता है, इस दिन तीज पर तीन चीजें तजने का भी विधान है।
 
1. पति से छल कपट, 2 .झूठ और दुर्व्यवहार 3. परनिन्दा।
 
तीज पर ही माता गौरा विरह में तपकर शिव से मिली थी। ये तीन सूत्र सुखी पारिवारिक जीवन के आधार स्तंभ हैं, जो वर्तमान आधुनिक समय में और भी प्रासंगिक हो जाते हैं।

ALSO READ: हरियाली तीज पर जपें यह 1 परम फलदायक मंत्र
 
Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

आदि शंकराचार्य का काल निर्धारण: 508 ईसा पूर्व या 788 ईस्वी में हुए थे शंकराचार्य?

अचानक बदलने वाली है इन 5 राशियों की तकदीर, ग्रहों का बड़ा संकेत

नास्त्रेदमस को टक्कर देते भारत के 7 भविष्यवक्ता, जानें चौंकाने वाली भविष्यवाणियां

मांगलिक दोष और वैवाहिक जीवन: क्या वाकई यह डरावना है या सिर्फ एक भ्रांति?

करियर का चुनाव और कुंडली का दसवां भाव: ग्रहों के अनुसार चुनें सही कार्यक्षेत्र

सभी देखें

धर्म संसार

24 April Birthday: आपको 24 अप्रैल, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 24 अप्रैल 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

मेष राशि में बुध का गोचर: 12 राशियों पर क्या पड़ेगा असर, जानें किसकी बदलेगी किस्मत

Sita Navami 2026: जानकी जयंती या सीता नवमी कब और क्यों मनाई जाती है?

ज्येष्ठ माह 60 दिनों का: इस दौरान 5 राशियों की किस्मत के तारे रहेंगे बुलंदी पर

अगला लेख