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होलिका दहन के दिन महालक्ष्मी जयंती, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

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lakshmi mata jayanti
दक्षिण भारतीय राज्यों में फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन समुद्र मंधन से निकली महा लक्ष्मी की जयंती मनाई जाती है। इस बार यह जयंती 03 मार्च 2026 को अर्थात होलिका दहन के दिन मनाई जाएगी। धन और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी, माता लक्ष्मी के प्राकट्य उत्सव 'लक्ष्मी जयंती' पर जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व ।
 

पूजा का शुभ मुहूर्त:

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 से 12:57 के बीच।
संध्या मुहूर्त: शाम को 06:46 के बाद।
 

क्षीर सागर से वैभव का उदय

लक्ष्मी जयंती केवल एक तिथि नहीं, बल्कि ब्रह्मांड में सुख-समृद्धि के अवतरण का दिन है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन (क्षीर सागर का विशाल मंथन) चल रहा था, तब उसी मंथन से रत्नस्वरूपा देवी लक्ष्मी का जन्म हुआ। फाल्गुन मास की पूर्णिमा का वह पावन दिन जगत के लिए सौभाग्य का उदय लेकर आया।
 

नक्षत्रों का दिव्य संयोग

आमतौर पर फाल्गुन पूर्णिमा के दिन आकाश में उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र अपनी आभा बिखेर रहा होता है। इसी कारण ज्योतिष और शास्त्रों में इस नक्षत्र का संबंध सीधा लक्ष्मी जयंती से जोड़ा गया है। यद्यपि उत्तर भारत में होली का उल्लास अधिक होता है, लेकिन दक्षिण भारतीय राज्यों में इस दिन को माता लक्ष्मी के जन्मोत्सव के रूप में अत्यंत श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया जाता है।
 

कृपा पाने का आध्यात्मिक मार्ग

देवी महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए यह दिन किसी स्वर्ण अवसर से कम नहीं है। भक्त इस दिन अपनी दरिद्रता के नाश और सुख-संपत्ति की कामना हेतु विशेष अनुष्ठान करते हैं:
लक्ष्मी होम (हवन): इस दिन घरों और मंदिरों में विशेष आहुतियां दी जाती हैं। हवन की अग्नि के माध्यम से अपनी प्रार्थनाएं माता तक पहुंचाई जाती हैं।
मंत्रों की गूंज: अनुष्ठान के दौरान 'लक्ष्मी सहस्रनामावली' (माता के 1000 दिव्य नाम) और 'श्री सूक्तम्' के पाठ से वातावरण को भक्तिमय और सकारात्मक बनाया जाता है।
कमल पुष्प की आहुति: देवी लक्ष्मी को कमल अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि यदि शहद में डूबे हुए कमल के पुष्पों की आहुति अग्नि में दी जाए, तो महालक्ष्मी प्रसन्न होकर भक्त के घर को धन-धान्य से भर देती हैं।
 

जीवन का सार

लक्ष्मी जयंती: लक्ष्मी जयंती हमें सिखाती है कि मंथन (कठोर परिश्रम) से ही लक्ष्मी (सफलता) की प्राप्ति होती है। यह दिन आत्मिक और भौतिक दोनों तरह की समृद्धि के द्वार खोलने का मार्ग है।
 

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