Festival Posters

भगवान विष्णु देव की 10 बातें, जो आपको जानना चाहिए

Webdunia
विष्णुधर्मोत्तर पुराण में वर्णन मिलता है कि लवण समुद्र के मध्य में विष्णु लोक अपने ही प्रकाश से प्रकाशित है। उसमें भगवान श्री विष्णु वर्षा ऋतु के चार मासों में लक्ष्मी द्वारा सेवित होकर शेषशय्या पर शयन करते हैं। 
 
पद्म पुराण के उत्तरखण्ड के 228वें अध्याय में भगवान विष्णु के निवास का वर्णन है। 
 
वैकुण्ठ धाम के अन्तर्गत अयोध्यापुरी में एक दिव्य मण्डप है। मण्डप के मध्य भाग में रमणीय सिंहासन है। वेदमय धर्मादि देवता उस सिंहासन को नित्य घेरे रहते हैं। 
 
धर्म, ज्ञान, ऐश्वर्य, वैराग्य सभी वहां उपस्थित रहते हैं। मण्डप के मध्यभाग में अग्नि, सूर्य और चंद्रमा रहते हैं। 
 
कूर्म, नागराज तथा सम्पूर्ण वेद वहां पीठ रूप धारण करके उपस्थित रहते हैं। 
 
सिंहासन के मध्य में अष्टदल कमल है; जिस पर देवताओं के स्वामी परम पुरुष भगवान श्री विष्णु लक्ष्मी के साथ विराजमान रहते हैं। 
 
भक्त वत्सल भगवान श्री विष्णु की प्रसन्नता के लिये जप का प्रमुख मन्त्र- ॐ नमो नारायणाय तथा ॐ नमो भगवते वासुदेवाय है। 
 
भगवान श्री विष्णु जी की पूजा के समय की जाने वाली आरती है। जय जगदीश हरे .... 
 
भृगु द्वारा त्रिदेवपरीक्षा से देवताओं ने माना कि विष्णु ही सर्वश्रेष्ठ हैं। 

ALSO READ: विष्णुसहस्रनाम : भगवान विष्णु के 1000 नाम

ALSO READ: भक्त वत्सल और दयालु हैं भगवान विष्णु देव

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

हिंदू पुराण, ज्योतिष, नास्त्रेदमस, बाबा वेंगा और भविष्‍य मालिका की 6 कॉमन भविष्यवाणियां

सूर्य का मीन राशि में गोचर: इन 6 राशियों के लिए खुलेंगे तरक्की और धन के नए रास्ते

चैत्र नवरात्रि 2026: घट स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है? जानें कलश स्थापना का सही समय

हिंदू नववर्ष 2083 के कौन है वर्ष का राजा और मंत्री, किन राशियों पर रहेगा शुभ प्रभाव

विक्रम संवत सबसे प्राचीन होने के बाद भी भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर क्यों नहीं बना? जानिए 3 बड़े कारण

सभी देखें

धर्म संसार

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (21 मार्च, 2026)

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 21 मार्च 2026: शनिवार का पंचांग और शुभ समय

21 March Birthday: आपको 21 मार्च, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

गणगौर ईसर-गौरी की अमर कथा: प्रेम, परीक्षा और सुहाग का वरदान

Mata chandraghanta: नवरात्रि की तृतीया देवी मां चंद्रघंटा: अर्थ, पूजा विधि, आरती, मंत्र, चालीसा, कथा और लाभ

अगला लेख