20 मार्च को मां कर्मादेवी जयंती मनाई जा रही है। मां कर्मादेवी भगवान की महान भक्त थीं, इसलिए श्रीकृष्ण ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए थे। तब माता ने अपने सामने बैठकर भगवान श्रीकृष्ण को खिचड़ी खिलाई थी। अत: इस दिन मां कर्मादेवी का पूजन-अर्चन अनिवार्य रूप से करने तथा खिचड़ी का भोग लगाकर प्रसाद बांटने की मान्यता है। इस दिन साहू तेली समाज द्वारा भक्त शिरोमणि मां कर्मादेवी की जयंती धूमधाम से मनाई जाती है।
साहू समाज की आराध्य देवी कर्मादेवी सेवा, त्याग और भक्ति समर्पण की देवी हैं। कर्माबाई की गौरव गाथा जनमानस में श्रद्धा तथा भक्तिभाव से वर्षों से चली आ रही है। मां कर्मादेवी का जन्म पापमोचनी एकादशी के दिन उत्तरप्रदेश के झांसी नगर में चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी को हुआ था।
मां कर्मादेवी बाथरी वंश की थीं। उनमें बाल्यावस्था से ही धार्मिक कहानियां सुनने की रुचि हो गई थी। कर्माबाई को जितना भी समय मिलता था, वह समय वे भगवान श्रीकृष्ण के भजन-पूजन व ध्यान आदि में लगाती थीं।
उन्होंने अपनी भक्ति से साक्षात श्रीकृष्ण के दर्शन किए और जगन्नाथपुरी में बहुत समय तक समुद्र के किनारे रहकर अपनी गोद में लेकर बालकृष्ण को अपने हाथों खिचड़ी खिलाई थी, ऐसी मान्यता है।
अपने तन, मन और धन से सामाजिक और धार्मिक कार्यों में लगी रहने वालीं कर्मादेवी दीन-दु:खियों के प्रति दया भावना रखती थीं। इस बार पूरे विश्व में कोरोना वायरस की बीमारी के प्रकोप के चलते यह उत्सव भव्य रूप से न मनाते हुए लघु रूप में मनाया जाएगा।
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राजश्री कासलीवाल
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