छठ पर्व की 4 महत्वपूर्ण परंपराएं, जिनके बगैर पूरी नहीं होती सूर्य आराधना

Webdunia
छठ पर्व सूर्य आराधना का अति विशेष पर्व है, जो विभिन्न परंपराओं को निभाते हुए 4 दिनों तक मनाया जाता है। जानिए 4 विशेष परंपराएं जिनके बिना छठ पर्व पूरा नहीं होता- 
 
1 'नहाय-खाय'-  छठ पर्व का पहला दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी 'नहाय-खाय' के रूप में मनाया जाता है। सबसे पहले घर की सफाई कर उसे पवित्र बना लिया जाता है। इसके पश्चात छठव्रती स्नान कर पवित्र तरीके से बने शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करते हैं। घर से सभी सदस्य व्रती के भोजनोपरांत ही भोजन ग्रहण करते हैं। भोजन के रूप में कद्दू-दाल और चावल ग्रहण किया जाता है। यह दाल चने की होती है।
 
2 लोहंडा और खरना - दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल पंचमी को व्रतधारी दिनभर का उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करते हैं। इसे 'खरना' कहा जाता है। खरना का प्रसाद लेने के लिए आसपास के सभी लोगों को निमंत्रित किया जाता है। प्रसाद के रूप में गन्ने के रस में बने हुए चावल की खीर के साथ दूध, चावल का पिट्ठा और घी चुपड़ी रोटी बनाई जाती है। इसमें नमक या चीनी का उपयोग ‍नहीं किया जाता है। इस दौरान पूरे घर की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
 
3 संध्या अर्घ्य - तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को दिन में छठ प्रसाद बनाया जाता है। प्रसाद के रूप में ठेकुआ, जिसे कुछ क्षेत्रों में टिकरी भी कहते हैं, के अलावा चावल के लड्डू, जिसे लडुआ भी कहा जाता है, बनाते हैं। इसके अलावा चढ़ावे के रूप में लाया गया सांचा और फल भी छठ प्रसाद के रूप में शामिल होता है।
 
शाम को पूरी तैयारी और व्यवस्‍था कर बांस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाया जाता है और व्रती के साथ परिवार तथा पड़ोस के सारे लोग अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने घाट की ओर चल पड़ते हैं। सभी छठव्रती एक तय तालाब या नदी किनारे इकट्ठा होकर सामूहिक रूप से अर्घ्य दान संपन्न करते हैं। सूर्य को जल और दूध का अर्घ्य दिया जाता है तथा छठी मैया की प्रसाद भरे सूप से पूजा की जाती है। इस दौरान कुछ घंटे के लिए मेले का दृश्य बन जाता है।
 
5 सूर्योदय अर्घ्य - चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। व्रती वहीं पुन: इकट्ठा होते हैं, जहां उन्होंने शाम को अर्घ्य दिया था। पुन: पिछली शाम की प्रक्रिया की पुनरावृत्ति होती है। अंत में व्रती कच्चे दूध का शरबत पीकर तथा थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण करते हैं। 
 
इस प्रकार 4 परंपराओं को बेहद श्रद्धा, आस्था और विश्वास के साथ निभाया जाता है और छठ पर्व को पूर्ण किया जाता है। 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

इस मंदिर में स्वयं समुद्र करता है भोलेनाथ का जलाभिषेक, क्या है निष्कलंक महादेव मंदिर के 5 शिवलिंगों का रहस्य

इस बार की महाशिवरात्रि क्यों हैं खास, जरूर करें ये 5 अचूक उपाय

28 फरवरी को ग्रहों की परेड, शाम को देख सकेंगे 7 ग्रहों को एक सीध में

महाशिवरात्रि में क्या है प्रदोषकाल में पूजा का महत्व?

होली के बाद रंगपंचमी कब है, क्या करते हैं इस दिन?

सभी देखें

धर्म संसार

Aaj Ka Rashifal: 25 फरवरी 2025 का दैनिक राशिफल, जानें 12 राशियों के लिए आज क्या होगा खास

मंगलवार को 108 बार हनुमान चालीसा पढ़ने से क्या होगा?

शिवजी की आरती करने का सही तरीका जानें

फाल्गुन माह की अमावस्या का महत्व और 5 अचूक उपाय जरूर जानें

शिवलिंग पर चंदन लगाने से क्या होता है? महाशिवरात्रि पर इसे चढ़ाने से कैसे प्रसन्न होंगे भोलेनाथ

अगला लेख
More