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शीतला माता पर्व : जानिए व्रत का महत्व...

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मां शीतला का पर्व किसी न किसी रूप में देश के हर कोने में मनाया जाता है। विशेष कर चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी-अष्टमी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2018 में शीतला सप्तमी पर्व 8 मार्च 2018, गुरुवार को मनाया जाएगा। साथ ही जिन घरों में अष्टमी तिथि को शीतला माता का पूजन किया जाता है, वह 9 मार्च, शुक्रवार को शीतला अष्टमी पर मां का पूजन करेंगे। 
 
शीतला माता पूजन से संबंधित विस्तृत उल्लेख पुराणों में मिलता है। हिंदू व्रतों में केवल शीतला सप्तमी अथवा शीतलाष्टमी का व्रत ही ऐसा है जिसमें बासी भोजन किया जाता है। इस पर्व को बसोरा (बसौड़ा) भी कहते हैं। बसोरा का अर्थ है बासी भोजन। इस दिन घर में ताजा भोजन नहीं बनाया जाता। एक दिन पहले ही भोजन बनाकर रख देते हैं। फिर दूसरे दिन प्रात:काल महिलाओं द्वारा शीतला माता का पूजन करने के बाद घर के सभी लोग बासी भोजन को खाते हैं। 
 
शीतला माता का मंदिर वटवृक्ष के समीप ही होता है। शीतला माता के पूजन के बाद वट का पूजन भी किया जाता है। ऐसी प्राचीन मान्यता है कि जिस घर की महिलाएं शुद्ध मन से इस व्रत को करती है, उस परिवार को शीतला देवी धन-धान्य से पूर्ण कर प्राकृतिक विपदाओं से दूर रखती हैं। शीतला माता हर तरह के तापों का नाश करती हैं और अपने भक्तों के तन-मन को शीतल करती हैं। कहते हैं कि नवरात्रि के शुरू होने से पहले यह व्रत करने से मां के वरदहस्त अपने भक्तों पर रहते हैं।
 
यह भी मान्यता है कि जिस घर में चेचक से कोई बीमार हो उसे यह व्रत नहीं करना चाहिए।
 

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