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हिन्दी कविता : दर्द का अर्थ...

पुष्पा परजिया
दर्द ने बहुत दर्द दिया है हमको,
अपनों ने दर्द का अर्थ समझा दिया है हमको।
 
नादां थे न समझ सके थे बेवफाइयां उनकी, 
करते रहे हर वक्त वो आजमाइशें हमारी।
 
और हम समझें उनको कितनी परवाह है हमारी,
उनके स्वार्थ को समझ न सके सोचा ये तो हक है उनका।
 
ढूंढते रहे, रह गए अकेले कौन अपने साथ है,
तन्हा जीवन को समझ लिया था मेला।
 
ये सोच-सोच खुश थे हम तो,
मासूमियत को जिसने नकारा उससे मिले हम बेइंतहा प्यार से।
 
हर बात को फायदे की नजर से देखने वालों ने जतलाया हमें,
अगाध स्नेह भी एक अभिशाप है।
 
खोकर शांति की गोद में जब सोचने को मजबूर हुए,
पाया सिर्फ खुद को तन्हा तब,
और उदासियों में हम खो गए।
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