Hanuman Chalisa

प्रवासी कविता : अनजानी राहें...

पुष्पा परजिया
एक अनजान राह पर चल पड़े मुसाफिर,
चलना था, बस चलना ही था इस राह पर।
 
आगे क्या होने वाला है, ये पता नहीं था,
अपने सब हैं, साथ खुशी थी इसकी काफी।
 
अपनों से दूर हुआ तो सहसा कांप उठा,
मन की धरती से आहों का संताप उठा।
 
सुख-दु:ख किसे सुनाएगा ए पथिक बता,
तेरी आंखों में तो भरे हैं अपनों के सपने।
 
तेरे इस पथ पर आते ही उनके सपने पूर्ण हुए,
पर मूक अनकहे तेरे अपने अरमां तो चूर्ण हुए।
 
किसे पता सोने के पिंजरे में पंछी की आहों का, 
दिखता है तो एक मुखौटा झूठ-मूठ की चाहों का।
 
मन में दबी उदासी बाहर से नजर नहीं आती,
छुपे हुए आंसू और आहें भी नजर नहीं आतीं।
 
अरमां सबके पूर्ण हुए, है इसका संतोष मगर,
दूर तलक तुझको अपनी मंजिल नजर नहीं आती।
Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

भरपूर लाभ के लिए रोज करें मंडूकासन; जानिए इसे करने का सही तरीका

पिंडली के दर्द से छुटकारा पाने के 5 कारगर तरीके जानें

jharkhand recipe: झारखंड का पारंपरिक पकवान ओकोपोको, जानिए कैसे बनता है यह व्यंजन

जब रास्ते बंद दिखें… समझ लो किस्मत नया दरवाज़ा खोल रही है

ताड़ासन शरीर को फौलादी और सुडौल बनाने वाला योगासन, इसके हैं 5 फायदे

सभी देखें

नवीनतम

Fathers Day 2026: फादर्स डे कब है? जानें तारीख, इतिहास और महत्व

18 जून को क्यों याद की जाती हैं रानी लक्ष्मीबाई? जानें उनके बलिदान की पूरी कहानी

Hindi Poem on Yoga: योग पर हिन्दी कविता: आओ मिलकर योग करें

Guru Arjan Dev: कैसे मनाया जाता है गुरु अर्जन देव जी का शहीदी दिवस?

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: जानिए इस बार की थीम, उद्देश्य और खास कार्यक्रम

अगला लेख