Publish Date: Fri, 28 Feb 2025 (22:06 IST)
Updated Date: Sat, 29 Mar 2025 (14:06 IST)
when is chaitra navratri 2025: होली के बाद गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया जाता है और तभी से चैत्र नवरात्रि का 9 दिवसीय पर्व प्रारंभ होता है। चैत्र माह की नवरात्रि 30 मार्च 2025 रविवार से प्रारंभ होकर 6 अप्रैल को रामनवमी रहेगी। 7 अप्रैल को इसका समापन होगा। 4 अप्रैल को सप्तमी और 5 अप्रैल 2025 को दुर्गा अष्टमी रहेगी। कई घरों में महाष्टमी के दिन ही पारण हो जाता है जबकि कई घरों में महानवी को पारण होगा।
घटस्थापना मुहूर्त- प्रात: 06:13 से सुबह 10:22 के बीच।
घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:01 से 12:50 के बीच।
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ- 29 मार्च 2025 को शाम 04:27 बजे से।
प्रतिपदा तिथि समाप्त- 30 मार्च 2025 को 12:49 बजे तक।
उदयातिथि के अनुसार चैत्र नवरात्रि प्रतिपदा 30 मार्च को रहेगी।
वर्ष में चार नवरात्रियां होती हैं उनमें से चैत्र नवरात्रि पहली नवरात्रि है। चैत्र माह हिंदू मास का प्रथम माह होता है। इन दौरान कुलदेवी की साधना का महत्व रहता है जबकि अश्विन माह में शारदीय नवरात्रि के दौरान उत्सव और आराधना का पर्व मनाया जाता है। इसके अलावा 2 गुप्त नवरात्रियां होती हैं। चैत्र नवरात्रि की पूजा पाठ या अधिकांश अनुष्ठान शारदीय नवरात्रि की तरह ही होते हैं। शारदीय नवरात्रि में घटस्थापना मुहूर्त एवं सन्धि पूजा मुहूर्त महत्वपूर्ण माना गया है जबकि चैत्र नवरात्रि में भी इन मुहूर्तों की आवश्यकता होती है।
कन्या पूजन विधि :
- नवरात्रि की नवमी पर हवन के बाद कन्या पूजन का खास महत्व रहता है।
- धार्मिक मान्यता के अनुसार 2 से 10 वर्ष की आयु की कन्या कुमारी पूजा के लिए उपयुक्त होती हैं।
- सभी कन्याओं को कुश के आसान पर या लकड़ी के पाट पर बैठाकर उनके पैरों को पानी या दूध से धोएं।
- फिर पैर धोने के बाद उनके पैरों में महावार लगाकर उनका श्रृंगार करें और फिर उनके माथे पर अक्षत, फूल और कुमकुम का तिलक लगाकर उनकी पूजा और आरती करें।
- इसके बाद सभी कन्याओं को भोजन कराएं। साथ ही एक लांगुरिया (छोटा लड़का) को खीर, पूरी, प्रसाद, हलवा, चने की सब्जी आदि खिलाएं।
- भोजन कराने के बाद उन्हें दक्षिणा दें, उन्हें रूमाल, चुनरी, फल और खिलौने देकर उनका चरण स्पर्श करके उन्हें खुशी खुशी से विदा करें।